देश में महंगाई सोना-चीनी और कई मुद्दों को लेकर माहौल काफी गर्म है। दाम बढ़ने से लोग परेशान है इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपया करीबन 95.70 के स्तर पर है। सोने की कीमतें उच्च स्तरों पर हैं। चीनी के दाम भी बढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ आरबीआई कह रहा है कि डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ने के बावजूद देश में नगदी की जो मांग है वह कम नहीं हो रही है। इन्हीं सब सवालों की साइड स्टोरी समझने के लिए देश के जाने-माने अर्थशास्त्री शरद कोहले ने नवभारत लाइव से बातचीत में कई सारी बातें साफ की हैं।
इस बीच जब उनसे आम आदमी के लिए कमजोर रुपया को लेकर बढ़े खतरे के बारें में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि देखिए सबसे बड़ा जो कमजोर रुपए का असर आम आदमी पर पड़ता है वो है महंगाई का। भले ही हम लोग डॉलर में कुछ नहीं खरीदते हैं। हम लोग तो अपना साधारण रुपए में खरीदते हैं। पर यह हमारे यहां जो हमारे आयात हैं उसको यह महंगा कर देता है। जो हमारे यहां इंपोर्ट होते हैं उसको महंगा करता है। हमारा ट्रेड डेफिसिट यानी कि एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के बीच के गैप को बढ़ा देता है। उदाहरण के तौर पर अभी आपने देखा कि जो कच्चा तेल है वह करीब $90 से ऊपर चल रहा है और काफी दिन हो गए हैं। यह होर्मुज अभी भी बंद है। ईरान यूएस का युद्ध का कोई हल नहीं निकल पाया है। और होर्मुज फ्लैश पॉइंट बना हुआ है। उसकी वजह से कच्चा तेल लगातार ऊपर है।
कच्चा तेल महंगा आने से सरकार ने आपको याद होगा पीछे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थी और खास-खासकर इसमें डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है। ट्रांसपोर्टेशन हर सामान आवाजाही होती है। एक जगह से दूसरी जगह जो भी सामान ले जाया जाएगा उसकी कॉस्ट बढ़ेगी। उसके अलावा जिन चीजों में आयात किया हुआ रॉ मटेरियल इस्तेमाल होता है, पेंट है, केमिकल है, फर्टिलाइजर है, हीलियम है, बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो भारत बाहर से मंगाता है। वो सब चीजों की कॉस्ट यहां से बढ़ जाती है। तो अगर आपकी बात का संक्षेप में मैं जवाब दूं तो रुपया कमजोर होने से हमारी आयात का बिल बढ़ता है। आयात का बिल बढ़ने से हमारे लिए सामान महंगा होता है। यानी आम आदमी को महंगाई की मार इसको मैं इंपोर्टेड इनफ्लेशन कहता हूं। इस बीच कई सवालों पर उन्होंने जवाब दिया है। पूरा मामला जाननें के लिए देखें पूरा इंटरव्यू