नई दिल्ली : भारत की सबसे बड़ी फूड ऑयल कंपनी अदाणी विल्मर लिमिटेड यानी एडब्लूएल ने एक बहुत बड़ा और अहम फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार ये जानकारी मिली है कि एडब्लूएल ने अदाणी ग्रुप से निकलने के बारे में सोचा है। इसको लेकर विल्मर ने आगे की बिजनेस स्ट्रैटेजी का भी खुलासा किया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि वह अपने हाई-मार्जिन वाले एफएमसीजी बिजनेस को बढ़ाने पर जोर दे रही है।
सूत्रों के अनुसार पता चला है कि विल्मर आईटीसी के समान स्ट्रैटेजी को अपनाते हुए अपने प्रमुख बिजनेस और वाइड डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा उठाने की तैयारी कर रही है। आईटीसी मे एफएमसीजी में विस्तार करने के लिए अपने सबसे मजबूत बिजनेस सिगरेट प्रोडक्शन का उपयोग किया है, उसी तरह एडब्लूएल अपने फूड ऑयल बिजनेस का उपयोग एफएमसीजी बढ़त के लिए आधार के रूप में करने के लिए तैयार है।
इस मामले से जुड़े सूत्रों ने ये जानकारी देते हुए बताया है कि अदाणी ग्रुप से बाहर निकलने के बाद, विल्मर इंडियन मार्केट में ज्यादा ग्लोबल एफएमसीजी ब्रांडों को लॉन्च कर सकती है। दिसंबर महीने की तिमाही में एडब्ल्यूएल के एफएमसीजी बिजनेस ने मात्रा के लिहाज से सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। टोटल सेल्स की मात्रा में फूड और एफएमसीजी की हिस्सेदारी बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो गई है। इस सेगमेंट का टोटल रेवेन्यू में हिस्सेदारी बढ़कर 9 प्रतिशत हो गई है।
बढ़ती महंगाई, हाई प्रोडक्शन कास्ट और प्राइस कम्पेटिटिवेनेस्स के कारण अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही के दौरान एफएमसीजी कंपनियों के प्रॉफिट में गिरावट आने की संभावना जतायी जा रही है। इसके अलावा इन एफएमसीजी कंपनियों के ऑपरेशनल प्रॉफिट भी काफी कम या स्थिर रह सकता है। कई एफएमसीजी कंपनियों के रेवेन्यू में निचले स्तर पर एक अंक की बढ़त की उम्मीद है। इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि कई कंपनियों ने दिसंबर महीने वाली तिमाही में नारियल, वनस्पति ऑयल और पाम ऑयल जैसे प्रोडक्ट्स की बढ़ती लागत के कारण इनकी कीमतों में बढ़त का ऑप्शन चुना है। आपको बता दें कि इसकी कीमतों में बढ़त ऐसे समय पर हुई है, जब हाई फूड इंफ्लेशन के कारण कम कंज्प्शन ने शहरी मार्केट को प्रभावित किया है।