8th Pay Commission Latest Update: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। यह आयोग 45 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 60 लाख पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। इस बीच कर्मचारी संगठन नई वेतन सिफारिशें लागू होने से पहले अंतरिम राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग की रिपोर्ट आने में अभी काफी समय लगेगा, इसलिए कर्मचारियों को पहले ही कुछ आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक आ सकती है। ऐसे में तब तक वेतन और पेंशन के बकाये का बोझ काफी बढ़ जाएगा। उनका सुझाव है कि महंगाई भत्ता (DA) अभी से बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए, ताकि बाद में बकाये का दबाव कम हो सके और कर्मचारियों को तुरंत राहत मिले।
केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से देय है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार करने के बजाय सरकार अभी कुछ राहत दे सकती है। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक, अगर भविष्य में फिटमेंट फैक्टर 2.0 तय होता है, तो सरकार पहले DA को मूल वेतन में मिलाकर 1.5 गुना वेतन संशोधन दे सकती है। बाद में आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद बाकी अंतर का भुगतान किया जा सकता है। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई, ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा के खर्चों से राहत मिलेगी। साथ ही सरकार पर एकमुश्त बकाये का बोझ भी कम होगा। पटेल का कहना है कि DA को मूल वेतन में मिलाने के बाद मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ते जैसे अन्य भत्तों में भी जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।
फिलहाल सरकार ने DA को मूल वेतन में जोड़ने के किसी प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दिसंबर 2025 में लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए कहा था कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है कि महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिला दिया जाए। श्रम एवं रोजगार मामलों के विशेषज्ञ रोहिताश्व सिन्हा का भी मानना है कि केंद्र सरकार अंतरिम राहत जैसे किसी फैसले पर काफी सावधानी से विचार करेगी।
सरकार करीब सात महीने पहले ही 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे चुकी है। इस समय आयोग अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर रहा है। आयोग कर्मचारी संगठनों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों से जुड़े ज्ञापन ले रहा है, ताकि अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा सके।