KC Tyagi Resign From JDU: राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने जेडीयू से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी की सदस्यता छोड़ते हुए अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने की बात कही है। इस्तीफा देते समय केसी त्यागी ने साफ किया कि उनका यह फैसला किसी तरह के मनमुटाव या नाराजगी के कारण नहीं है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए लिखा कि मैं किसी भी तरह की नाराजगी के साथ नहीं जा रहा हूं। गौरतलब है कि जेडीयू में केसी त्यागी का कद शीर्ष नेताओं में माना जाता था। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
दरअसल, केसी त्यागी उत्तर प्रदेश से आते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनके काफी समर्थक भी हैं। इस बीच उनका कहना है कि वह किसी दुर्भावना में नहीं हैं और बिहार और नीतीश कुमार से लंबा जुड़ाव रहा है। अब उनकी इच्छा है कि वह उत्तर प्रदेश में काम करें। दरअसल, 22 मार्च को दिल्ली मावलंकर हॉल में केसी त्यागी एक बैठक करेंगे इस बैठक में उनके समर्थक भी मौजूद रहेंगे और आगे की रणनीति की चर्चा होगी। इसके अलावा केसी त्यागी का कहना है कि उन्हें नीतीश कुमार के साथ काम करने में कोई संकोच नहीं होता। साथ ही अपने पत्र में उन्होंने सदस्यता रिन्यू न कराने की बात कही है।
वैसे तो केसी त्यागी को कौन नहीं जानता, नीतीश कुमार के सच्चे साथी, उनकी पार्टी के मजबूत नेता लेकिन केसी त्यागी जब और चर्चा में आए जब उन्होंने जनवरी में नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई थी। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। राजनीतिक हलकों में उनके इस कदम को 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश के तौर पर देखा गया। हालांकि जेडीयू ने उनके बयान से खुद को अलग कर लिया था।
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केसी त्यागी ने यह भी बताया कि पार्टी का सदस्यता अभियान खत्म हो चुका है। इस बार उन्होंने सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। साथ ही उन्होंने बताया कि जेडीयू का गठन 30 अक्टूबर 2003 को समता पार्टी और जनता दल के विलय से हुआ था। उस समय जॉर्ज फर्नांडिस पार्टी के अध्यक्ष थे और वह महासचिव के रूप में उनके साथ मिलकर काम करते थे। इसके अलावा उन्होंने शरद यादव और नीतीश कुमार के जेडीयू अध्यक्ष रहते हुए भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने कहा कि वंचित, दबे-कुचले वर्गों, किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह बनी रहेगी।