Bihar Election 2025: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों ने मांग की है कि इस प्रक्रिया पर सदन में बहस कराई जाए। लेकिन सरकार ने साफ तौर कर दिया है कि इस मुद्दे पर चर्चा संभव नहीं है। इस टकराव की वजह से संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया है। इसके तहत राज्य में मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है। 1 अगस्त 2025 को इस प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हुआ, जिसमें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई है। इस लिस्ट के आधार पर मतदाता सुधार, नाम जोड़ने और हटाने का कार्य किया जाएगा।
विपक्ष ने आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। इसके सा ही यह राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल की जा रही है। विपक्षी सांसद लगातार संसद में SIR प्रक्रिया पर बहस की मांग कर रहे हैं और सरकार पर चुनाव आयोग के फैसलों को प्रभावित करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव निष्पक्ष नहीं रह जाएंगे।
सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार करते हुए तर्क दिया है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिस पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी आयोग के कार्यों पर संसद में चर्चा की अनुमति नहीं दी गई थी। इसलिए सरकार अब भी उसी परंपरा का पालन कर रही है।
शुक्रवार को भी संसद में हंगामे की भेंट चढ़ गई थी। इसी मुद्दे पर विपक्ष के जोरदार विरोध के चलते कोई कामकाज नहीं हो सका। दोनों सदनों में शोरगुल, नारेबाजी और तख्तियां दिखाए जाने की वजह से सत्र बार-बार स्थगित करना पड़ा। ऐसे में मॉनसून सत्र की उत्पादकता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।