असदुद्दीन ओवैसी व नीतीश कुमार (डिजाइन) 
बिहार

बिहार में सरकार बनाएगी AIMIM? सेट कर लिए सारे समीकरण, नीतीश कुमार को दिया सबसे बड़ा ऑफर

Bihar Politics: बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने बिहार में सरकार बनाने का ख्वाब पाल लिया है।

अभिषेक सिंह

Bihar Assembly Elections: बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने बिहार में सरकार बनाने का ख्वाब पाल लिया है। सीमांचल में 5 सीटों को जीतने के बाद ओवैसी की पार्टी बिहार में सरकार और पार्टी का सीएम बनाने का सपना भी देख रही है।

ओवैसी की पार्टी ने नया समीकरण गढ़ते हुए आरजेडी और जेडीयू को अपने साथ आने का ऑफर दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने मुख्यमंत्री पर पर भी दावेदारी पेश की है और बदले में नीतीश कुमार को 2029 में पीएम उम्मीदवार बनाने का वादा किया गया है। चलिए जानते AIMIM ने क्या समीकरण बिठाए हैं और किसे क्या ऑफर किया है।

AIMIM ने इन पार्टियों को दिया ऑफर

दरअसल, AIMIM बिहार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा गया है कि सरकार बनाने की अभी भी संभावना है। पार्टी का कहना है कि अगर जेडीयू, आरजेडी, कांग्रेस, एआईएमआईएम, सीपीआईएमएल और सीपीआईएम एकजुट हो जाएं, तो सरकार बन सकती है।

गौरतलब है कि जेडीयू के पास 85 सीटें हैं, जबकि आरजेडी के पास 25 हैं। कांग्रेस और एआईएमआईएम ने क्रमशः 6 और 5 सीटें जीती हैं। सीपीआई-एमएल और सीपीआई-एम ने 3-3 सीटें जीती हैं। इनकी कुल सीटें 124 हैं, जो बिहार में बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से दो ज्यादा हैं।

AIMIM ने बनाई सरकार की रूपरेखा

एआईएमआईएम की कल्पनाएं बेकाबू हो गई हैं, यहां तक कि उन्होंने कैबिनेट की रूपरेखा भी बना ली है। पार्टी ने कहा कि उसका एक मुख्यमंत्री होगा, जबकि जेडीयू के कोटे में दो उपमुख्यमंत्री और 20 मंत्री शामिल हो सकते हैं। आरजेडी को 6 मंत्री दिए जा सकते हैं, जबकि कांग्रेस को दो मंत्री पद मिलेंगे।

नीतीश को पेश किया 'मनचाहा' पद

सीपीआई-एमएल और सीपीआईएम, दोनों को एक-एक मंत्री पद मिल सकता है। इसके अलावा, नीतीश कुमार को 2029 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। ओवैसी की पार्टी ने कहा, "हम हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं। इसलिए अभी भी संभावना है।"

मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में खासा प्रभाव रखने वाली इस पार्टी ने 243 विधानसभा सीटों में से 29 पर चुनाव लड़ा था। इनमें से 24 सीटें सीमांचल क्षेत्र में हैं। एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले महागठबंधन में शामिल होने की पूरी कोशिश की थी।

जब राजद और कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो ओवैसी की पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। माना जा रहा है कि मुस्लिम वोटों के बिखराव ने भी राजद और कांग्रेस की हार में योगदान दिया। ओवैसी की पार्टी सीमांचल में पाँच सीटें जीतने में कामयाब रही, लेकिन करीबी मुकाबलों में उसे कई सीटें हारनी पड़ीं।

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