Hybrid vs Electric Car में क्या होता है अतंर। (सौ. Freepik)
नवभारत ऑटोमोबाइल डेस्क: ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की मांग में जबरदस्त वृद्धि हो रही है। हालांकि, इन दोनों तकनीकों के बीच अंतर को लेकर काफी भ्रम रहता है। आइए जानते हैं हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के बीच प्रमुख अंतर और आपके लिए कौन-सी कार बेहतर हो सकती है।
हाइब्रिड कार: दोहरी तकनीक वाली कारें
हाइब्रिड कारें पारंपरिक इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का इस्तेमाल करती हैं। ये कारें इंजन और बैटरी के बीच स्वचालित रूप से स्विच कर सकती हैं। हाइब्रिड कारों को दो श्रेणियों में बांटा जाता है:
1. माइल्ड हाइब्रिड
- इनमें एक छोटा इलेक्ट्रिक मोटर लगाया जाता है जो माइलेज बढ़ाने में मदद करता है।
- यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोड में नहीं चल सकती बल्कि इंजन के साथ मिलकर काम करती है।
2. स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (फुल हाइब्रिड)
- यह कारें ईवी मोड में भी चल सकती हैं, यानी कम स्पीड पर सिर्फ बैटरी से चलती हैं और हाई स्पीड पर इंजन का उपयोग करती हैं।
- बेहतर माइलेज और कम ईंधन खपत इनकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
इलेक्ट्रिक कार: पूरी तरह बैटरी पर निर्भर
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पूरी तरह बैटरी से चलती हैं और इनमें किसी भी प्रकार का पेट्रोल या डीजल इंजन नहीं होता।
- इन्हें चार्जिंग स्टेशन या घर पर लगे चार्जर से चार्ज किया जाता है।
- एक बार चार्ज करने पर 200-500 किमी तक की रेंज दे सकती हैं।
- अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे देशों में EVs का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी सीमित है।
हाइब्रिड बनाम इलेक्ट्रिक: कौन-सी बेहतर?
- इलेक्ट्रिक कारें ज्यादा ईको-फ्रेंडली हैं क्योंकि इनमें कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।
- हाइब्रिड कारें भी कम उत्सर्जन करती हैं, लेकिन इनमें पेट्रोल/डीजल का इस्तेमाल होता है।
- हाइब्रिड कारें पेट्रोल/डीजल के साथ इलेक्ट्रिक पावर का उपयोग कर बेहतर माइलेज देती हैं।
- इलेक्ट्रिक कारें पूरी तरह से बैटरी पर निर्भर होती हैं, इसलिए उनमें ईंधन की कोई लागत नहीं आती।
- इलेक्ट्रिक कारों के लिए चार्जिंग स्टेशन जरूरी होता है, जो हर जगह उपलब्ध नहीं हैं।
- हाइब्रिड कारें ज्यादा सुविधाजनक हैं क्योंकि वे पेट्रोल पंप से ईंधन भरकर आसानी से चलाई जा सकती हैं।