Delhi में पुरानी गाड़ियों के लिए टॉप्स। (सौ. X) 
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दिल्ली में पुरानी गाड़िया बैन, अब क्या करें गाड़ी मालिक? जानिए तीन बड़े विकल्प

दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2025 से पुरानी डीजल और पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के लिए ईंधन सप्लाई बंद कर दी है। इस फैसले से कई गाड़ियों के मालिक परेशान है लेकिन इन 3 तरीको से वो परेशानी से बाहर निकल सकते है।

सिमरन सिंह

दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2025 से 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के लिए ईंधन सप्लाई बंद कर दी है। इस फैसले से हजारों वाहन मालिक प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अब या तो अपनी गाड़ी बेचनी पड़ रही है या बेहद कम कीमत पर स्क्रैप करानी पड़ रही है। खासकर लक्जरी कार मालिकों को भारी घाटा झेलना पड़ रहा है।

नियम तोड़ा तो लगेगा भारी जुर्माना

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • चार पहिया वाहनों पर ₹10,000
  • दोपहिया वाहनों पर ₹5,000 तक का जुर्माना
  • इसके लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं, जो पुराने वाहनों की पहचान कर चालान और जब्ती की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

अब गाड़ी मालिकों के पास हैं ये 3 प्रमुख विकल्प

1. स्क्रैप पॉलिसी के तहत गाड़ी को स्क्रैप कराना

सरकार की Registered Vehicle Scrapping Facility (RVSF) में गाड़ी जमा कर के उसे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नष्ट किया जा सकता है। इसके बदले Certificate of Deposit (CoD) मिलता है जिससे नई गाड़ी पर रोड टैक्स में 25% (निजी) और 15% (कमर्शियल) की छूट मिलती है। गाड़ी की हालत के अनुसार ₹50,000 से ₹3 लाख तक स्क्रैप वैल्यू मिल सकती है। हालांकि, रीसेल वैल्यू कम होती है।

2. दिल्ली-एनसीआर से बाहर गाड़ी बेचना

आप अपनी गाड़ी को किसी ऐसे राज्य में बेच सकते हैं जहां उम्र आधारित प्रतिबंध नहीं हैं। इसके लिए इंटर-स्टेट ट्रांसफर, नई RTO से रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स भुगतान जैसी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह तरीका थोड़ा पेचीदा जरूर है, लेकिन बेहतर कीमत दिला सकता है।

3. पेट्रोल गाड़ियों में CNG कन्वर्जन

यदि आपकी पेट्रोल कार फिटनेस और प्रदूषण जांच में पास हो जाती है, तो आप उसमें ARAI प्रमाणित CNG किट लगवा सकते हैं। इससे गाड़ी की लाइफ बढ़ती है और वह फिर से सड़कों पर चलने के योग्य हो जाती है। CNG किट की कीमत ₹50,000 से ₹1 लाख तक हो सकती है, लेकिन ईंधन खर्च काफी कम हो जाता है। हालांकि, सभी गाड़ियां खासकर डीजल मॉडल CNG में कन्वर्ट नहीं हो पातीं।

ध्यान दें

दिल्ली सरकार के इस सख्त फैसले ने भले ही वाहन मालिकों को मुश्किल में डाला हो, लेकिन उनके पास समझदारी से चुनने के लिए कई रास्ते मौजूद हैं। सही निर्णय लेने से न सिर्फ आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान दिया जा सकता है।

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