car crash (Source. Freepik) 
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अब दीवार से नहीं टकराएंगी कारें, कंप्यूटर पर होगा क्रैश टेस्ट, सुरक्षा बढ़ेगी और कीमत घटेगी

Car Crash Test: क्रैश टेस्ट का नाम सुनते ही तेज रफ्तार कारों का दीवार से टकराना आंखों के सामने आ जाता है। लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर बदलने वाली है। Dassault Systemes इसको बदल देंगा।

सिमरन सिंह

Car Safety Rating: कार की सुरक्षा जांच यानी क्रैश टेस्ट का नाम सुनते ही तेज रफ्तार कारों का दीवार से टकराना आंखों के सामने आ जाता है। लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर बदलने वाली है। Dassault Systemes की नई तकनीक की मदद से अब कार सेफ्टी को परखने के लिए असली गाड़ियों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंपनी 'वर्चुअल सेफ्टी सिमुलेशन' के जरिए कंप्यूटर पर ही एक्सीडेंट जैसी स्थिति तैयार कर रही है।

डिजिटल ट्विन से बनेगा पूरा एक्सीडेंट सीन

इस तकनीक में 'डिजिटल ट्विन' का इस्तेमाल किया जाता है। यानी कार का बिल्कुल वैसा ही डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है, जैसा वह असल जिंदगी में होती है। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पर कार की टक्कर, स्पीड, एंगल और झटकों की पूरी गणना की जाती है। इससे न सिर्फ कार के मटीरियल की मजबूती का अंदाजा लगता है, बल्कि हादसे के वक्त इंसान के शरीर पर कितना दबाव पड़ेगा, यह भी बेहद सटीक तरीके से पता चल जाता है।

महंगे क्रैश टेस्ट से मिलेगी राहत

रियल लाइफ क्रैश टेस्ट बेहद खर्चीले होते हैं। बड़ी कंपनियां तो यह खर्च उठा लेती हैं, लेकिन नए या छोटे ब्रांड्स के लिए यह आसान नहीं होता। ऐसे में डसॉल्ट सिस्टम्स की यह तकनीक गेम बदलने वाली साबित हो सकती है। वर्चुअल टेस्टिंग का खर्च काफी कम है और इसमें किसी तरह का फिजिकल नुकसान भी नहीं होता। इससे छोटे स्टार्टअप्स भी कम बजट में सेफ्टी टेस्ट करवा सकेंगे।

ग्लोबल मानकों में वर्चुअल टेस्टिंग की एंट्री

तकनीक बनाना ही काफी नहीं, उसे सरकारी मंजूरी भी चाहिए। डसॉल्ट सिस्टम्स इस दिशा में अमेरिकी नियामक संस्था NHTSA के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि वर्चुअल टेस्टिंग को 'रोड-वर्थीनेस' का आधिकारिक प्रमाण माना जा सके। आने वाले समय में कारों की सेफ्टी रेटिंग के लिए फिजिकल क्रैश टेस्ट सिर्फ एक अंतिम औपचारिकता बनकर रह सकते हैं, जबकि असली जांच कंप्यूटर लैब में होगी।

भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए गेम-चेंजर

भारत में Bharat NCAP (BNCAP) लागू होने के बाद कार सेफ्टी को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है। टाटा और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों के बाद अब छोटे ब्रांड्स और स्टार्टअप्स की बारी है। डसॉल्ट सिस्टम्स की यह तकनीक भारतीय कंपनियों को कम खर्च में ग्लोबल स्टैंडर्ड की सुरक्षित कारें बनाने में मदद करेगी। इससे भारत एक 'सेफ ऑटो हब' के रूप में उभर सकता है और आम ग्राहकों को किफायती दामों पर ज्यादा सुरक्षित, वर्ल्ड-क्लास कारें मिल सकेंगी।

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