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आखिर कोवैक्सीन के इमर्जेंसी यूज ऑथराईजेशन (EUA) पर संदेह की स्थिति क्यों ?

अमित बोरकर

किसी संदेहास्पद वैक्सीन (Vaccine) पर सवाल उठाने का मतलब वैक्सीन का विरोध कैसे हो सकता है ? प्रश्न यह है कि एक वैक्सीन को जल्दबाजी में बिना एफीकैसी के आंकड़ों के EAU  कैसे मिल गया ? अब जो यह सवाल पूछे वो राष्ट्रद्रोही कैसे। धीरे धीरे इस देश में साईंटिफिक टेंपरामेंट कम होता जा रहा है। जो कि चिंता की बात है। मैं वैक्सीन लूँगा और मिल गयी तो कोवैक्सीन (Covaxine) भी ले लूंगा पर साईंटिफिक मसलों में गोलमाल ठीक नही।

भारत में अब तक दो वैक्सीन्स को इमरजेंसी यूज ऑथराईजेशन की अनुमति मिल चुकी है। इसमें पहली कोवीशील्ड है जो कि सीरम इंस्टीट्यूट आक्सफोर्ड (Serum Institute Oxford) और एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की वैक्सीन है दूसरी कोवैक्सीन जिसे भारत बायोटेक (Bharat Biotech), आईसीएमआर और एनआईवी ने मिलकर बनाया है। विवाद कहाँ है ? आईये जानते हैं।

किसी वैक्सीन के दो गुण बेहद महत्वपूर्ण हैं 

सेफ्टी और एफीकैसी

सेफ्टी को सामान्य भाषा में यूँ समझ सकते हैं कि अमुक वैक्सीन किसी भी व्यक्ति पर कितनी सुरक्षित है और उसके साईड इफेक्ट्स यदि हैं तो कितने कम या अधिक हैं आदि। वहीं एफीकैसी का आम भाषा में मतलब यह है कि यह वैक्सीन लगने के बाद कोविड से बचाव में कितनी प्रभावी है । इस प्रभाव को कंपनियाँ प्रतिशत में बताती हैं जैसे कि 90% या 70 % आदि।

जब तक इन दोनो विषयों के बारे में फेज 3 ट्रायल तक की जानकारी नही मिलती तब तक वैक्सीन का इमर्जेंसी वाला उपयोग नही हो सकता क्यों कि ड्रग कंट्रोलर उसे  EUA लाईसेंस नही देगा । भारत की दो वैक्सीन्स में से एक कोवीशील्ड की सेफ्टी और एफीकैसी के आरंभिक डाटा उपलब्ध हैं इसलिए उसे EUA मिल गया वहीं कोवैक्सीन का एफीकैसी डाटा अभी तक अज्ञात है । मसला यही है कि बिना एफीकैसी की जानकारी के EUA कैसे दे दिया गया ? ICMR के चीफ का बयान आया कि जानवरों की एफीकैसी के आंकड़ों के आधार पर EUA दिया गया । ऐसा सिर्फ हम ही कर सकते हैं ।

कोवैक्सीन 100% कारगर हो सकती है या 10% भी । यदि 100% निकली तो हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ होगी परंतु 10% निकली तो क्या होगा ?  क्या 10% या 20% एफीकैसी निकलने के बाद  जनता को फिर से कोई दूसरी वैक्सीन लगवानी होगी ? कोवैक्सीन का एफीकैसी डाटा बहुत जल्दी आने वाला है। कोवीशील्ड की समुचित मात्रा कोरोना वारियर्स के लिए लिए तैयार है ऐसे में एक प्रतिष्ठित कंपनी की कोवैक्सीन को जबरदस्ती का अल्प्रूवल देकर हमें क्या हासिल हुआ ।

1-जनता में अविश्वास

2-परिमामस्वरूप वैक्सीन ड्राइव को धक्का

3-विश्व में हमारी क्षमता एवं पारदर्शिता को लेकर संदेह 

मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ कि कोवैक्सीन अच्छी होगी पर खाँमखाँ की जल्दबाजी के चक्कर में उसका बड़ा व्यवसायिक नुकसान तय है । साथ साथ जो लोग वैक्सीन को भारत की बनी या लोकल वोकल या देशभक्ति से जोड़ रहे हैं ऐसे लोगों को बुद्धू समझकर माफ करें । साईंटिफिक मसलों में ऐसी जुमलेबाजी नही चलती ।

कुछ दिनों के बाद जब कोवैक्सीन का एफीकैसी डाटा मिल जाता और तब अप्रूवल दिया जाता तो निसंदेह बेहतर होता । यह सच है कि जब जब राजनीति वैज्ञानिक प्रयासों पर अतिक्रमण करती है तो नतीजे अच्छे नही आते । कोवैक्सीन पर संदेह नही सरकार की एजेंसिओं की कार्यप्रणाली पर संदेह है ।

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