

Donald Trump Iran Warning: ईरान में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब वैश्विक तनाव का रूप ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी जारी रही तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में महायुद्ध छिड़ने की आशंका तेज हो गई है।
तेहरान समेत पूरे देशभर में महिलाएं और आम नागरिक अपनी आजादी और अधिकारों को लेकर सड़कों पर हैं। अब तक इन प्रदर्शनों में 500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इसी बीच ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को सख्त चेतावनी दी है, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश दिया कि ईरान आजादी की तरफ देख रहा है और यदि हिंसा नहीं रुकी तो अमेरिकी सरकार जवाब देगी। ट्रंप को पहले ही ईरान के सैन्य और गैर-सैन्य ठिकानों पर हमलों के विकल्पों के बारे में ब्रीफिंग दी जा चुकी है।
अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उनकी पत्नी समेत बंधक बना लिया है, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान अगला निशाना हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सैन्य कार्रवाई करना वेनेजुएला की तुलना में कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरा होगा।
यदि अमेरिका हमला करता है, तो ईरान ने कतर के 'अल उदेद' बेस सहित मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के सभी 19 सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें और हिजबुल्लाह व हूती जैसे प्रॉक्सी समूह हैं, जो इजरायल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जंग की स्थिति में ईरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक कर सकता है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे अमेरिका, इजरायल और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर हो सकती हैं,। साथ ही, यह संकट दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट पैदा कर सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 40-50% कच्चे तेल का आयात मध्य पूर्व से करता है। यदि युद्ध के कारण तेल की सप्लाई बाधित होती है तो भारत की GDP वृद्धि में 0.3% की कमी आ सकती है और मुद्रास्फीति 0.4% तक बढ़ सकती है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में रह रहे लगभग 90 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन जाएगी। भारत को अमेरिका, इजरायल और ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के बीच एक कठिन संतुलन बनाना होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का लंबा इतिहास रहा है। 1953 के तख्तापलट से लेकर 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या और 2025 में 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के तहत परमाणु स्थलों पर हमलों तक दोनों देशों के बीच अक्सर टकराव की स्थिति रही है। यदि अब पूर्ण युद्ध छिड़ता है, तो यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े मानवीय और आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है।