US Visa Bond: 50 देशों के लिए US वीजा बॉन्ड स्कीम हुई परमानेंट, चेक करें लिस्ट में भारत है या नहीं ?

US Visa Bond: अमेरिका ने 50 देशों के लिए वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को स्थायी कर दिया है। इसमें B-1 और B-2 वीजा के लिए 20,000 डॉलर तक जमा करने पड़ सकते हैं। फिलहाल भारत इस लिस्ट में नहीं है।
US Visa Bond: US Makes Visa Bond Program Permanent For 50 Countries Is India On The List News Now
US वीजा बॉन्ड स्कीम (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US Visa Bond Program Permanent For 50 Countries: अमेरिका ने अपने वीजा नियमों को लेकर एक बहुत ही बड़ा और अहम फैसला लिया है। स्टेट डिपार्टमेंट ने वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को अब पायलट स्कीम से हटाकर स्थायी रूप से लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब अमेरिका जाने वाले कई नागरिकों को एक तय वीजा बॉन्ड देना होगा। यह नियम पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद 50 देशों के लिए लाया गया है।

इस अहम फैसले से भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के नागरिकों पर असर पड़ेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल भारत को इस नई और सख्त लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। लेकिन वीजा आवेदकों को भविष्य में बी-1 और बी-2 वीजा के लिए भारी राशि जमा करनी पड़ सकती है। यह नया नियम तीन अगस्त से फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के बाद पूरी तरह लागू हो जाएगा।

कितना जमा करना होगा बॉन्ड

नए नियम के मुताबिक कॉन्सुलर अधिकारी वीजा देने के लिए अब भारी रकम मांग सकते हैं। आवेदकों को वीजा शर्तों के तहत 20,000 डॉलर तक का भारी बॉन्ड जमा करने के लिए कहा जा सकता है। पहले 5,000 डॉलर का विकल्प भी था लेकिन अब इसे पूरी तरह से हटा दिया गया है। पायलट प्रोग्राम में अधिकारी 10,000 या 15,000 डॉलर तक के बॉन्ड की भी मांग कर सकते थे।

पायलट प्रोजेक्ट में मिली सफलता

यह फैसला वीजा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम की एक साल की लंबी समीक्षा के बाद लिया गया है। इस समीक्षा में यह पाया गया कि बॉन्ड प्रोग्राम वीजा धारकों को नियमों का पालन कराने में प्रभावी था। इससे पहले डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट और होमलैंड सिक्योरिटी ने इसका बारीकी से पूरा आकलन किया था। इन विभागों का साफ मानना है कि बॉन्ड से लोग वीजा की समय सीमा के भीतर लौट जाएंगे।

किन देशों पर लागू होगा नियम

यह नया नियम मुख्य रूप से अफ्रीका महाद्वीप के करीब 30 देशों पर विशेष रूप से लागू होगा। अमेरिका में अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए ही ट्रंप प्रशासन ने यह बहुत सख्त कदम उठाया है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को रोकना है जो अपनी वीजा अवधि खत्म होने के बाद रुक जाते हैं। भविष्य में अमेरिका इस लंबी लिस्ट में दुनिया के अन्य देशों को भी आसानी से शामिल कर सकता है।

आलोचकों ने उठाए कई बड़े सवाल

अधिकारों के लिए काम करने वाले कई लोगों ने अमेरिका के इस फैसले की भारी आलोचना भी की है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिका की वैध यात्रा पर बहुत ही बुरा और नकारात्मक असर पड़ सकता है। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने कानूनी इमिग्रेशन को भी बहुत ज्यादा मुश्किल बना दिया है। हालांकि ट्रंप का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को पूरी तरह से मजबूत करने के लिए बहुत ही जरूरी है।

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