'रेगिस्तान में रेत के कण जैसा था मिशन!' फेल हुई दुश्मनों की घेराबंदी, US ने बताया कैसे किया पायलट को रेस्क्यू

US-Iran War: अमेरिकी सेना ने ईरान में "नो-फेल" रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर अपने पायलट को सुरक्षित बचा लिया है। जॉइंट चीफ्स डैन केन और जॉन रैटक्लिफ ने इस साहसी मिशन की रोमांचक कहानी साझा की है।
US Pilot Rescue Iran
अमेरिकी आर्मी चीफ ऑफ स्‍टाफ और CIA चीफ (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US Pilot Rescue Iran: अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने व्हाइट हाउस से दुनिया को एक सख्त संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों को किसी भी हाल में, दुनिया के किसी भी कोने से वापस लाने की क्षमता रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ती।

वहीं, जॉन रैटक्लिफ ने इस रेस्क्यू मिशन की जटिलता को बताते हुए कहा कि ईरान में गिरे पायलट को ढूंढना “रेगिस्तान में रेत के एक कण” को खोजने जैसा था। उन्होंने बताया कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) ने इस मिशन में ह्यूमन और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया और ईरान को भ्रमित करने के लिए एक भ्रामक रणनीति भी अपनाई।

ईरान में नो-फेल रेस्क्यू ऑपरेशन

रैटक्लिफ के अनुसार, शनिवार सुबह यह पुष्टि हुई कि पायलट जिंदा है और एक पहाड़ी दरार में छिपा हुआ है। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर “नो-फेल” रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। उन्होंने गर्व से कहा कि अमेरिकी सेना की परंपरा है अपने किसी भी साथी को पीछे न छोड़ना। डैन केन ने कहा कि किसी भी बचाव अभियान की सफलता काफी हद तक उस पायलट की मानसिक ताकत और जीवित रहने की इच्छा पर निर्भर करती है। इस मिशन में भी पायलट ने असाधारण साहस और दृढ़ता दिखाई, जो सफलता का बड़ा कारण बना।

ऑपरेशन के दौरान हुई भारी गोलाबारी

उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में एक अमेरिकी A-10 विमान पायलट की तलाश कर रहा था, तभी उस पर ईरान में मौजूद हथियारबंद समूहों ने भारी गोलीबारी की। विमान को नुकसान पहुंचा और उसे पास के एक मित्र देश की ओर जाना पड़ा, जहां पायलट ने सुरक्षित रूप से इजेक्ट किया।

इसके बाद दूसरे चालक दल के सदस्य की तलाश जारी रही। यह एक तरह का “चूहे-बिल्ली का खेल” बन गया था, जहां एक तरफ अमेरिकी सेना अपने जवान को बचाने में जुटी थी, तो दूसरी ओर ईरानी बल उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। अंततः अमेरिकी सेना इस मिशन में सफल रही।

डैन केन ने यह भी खुलासा किया कि पूरे ऑपरेशन के दौरान ऊपर से एक बड़े “एयर अरमाडा” यानी हवाई बेड़े की सुरक्षा दी गई, ताकि किसी भी संभावित हमले को रोका जा सके। आखिरकार, दोनों चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से अमेरिकी नियंत्रण में वापस आ गए।

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