Indo Pacific Command: मोदी ट्रंप की G7 मुलाकात से पहले अमेरिका ने हटाया इंडो पैसिफिक कमांड से "इंडो"

US Indo Pacific Command: फ्रांस में पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले अमेरिका ने अपनी इंडो-पैसिफिक कमांड से इंडो शब्द हटा दिया है। क्वाड से जुड़े इस फैसले को बड़ा संकेत माना जा रहा है।
Indo Pacific Command: US Drops Indo From Indo Pacific Command Name Ahead Of Modi Trump G7 Meeting
इंडो-पैसिफिक कमांड से हटाया "इंडो" (सोर्स- AI इमेज)
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US Indo Pacific Command News: फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी मुलाकात होने वाली है। लेकिन इस अहम बैठक से ठीक पहले अमेरिकी प्रशासन ने एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव कर दिया है। अमेरिका ने अपनी सैन्य कमान के नाम 'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' शब्द को पूरी तरह से हटा दिया है।

यह कदम उस समय उठाया गया है जब 'इंडो' शब्द को ही भारत और अमेरिका के अहम गठबंधन क्वाड (QUAD) का मुख्य आधार माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस नाम बदलाव का सीधा मतलब है कि अमेरिका अब पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को जोड़ने के बजाय सिर्फ प्रशांत महासागरीय हितों पर ध्यान देगा। यह भारत के लिए बड़ा रणनीतिक और कूटनीतिक संकेत है।

पुरानी पहचान की वापसी

साल 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने इसका नाम यूएस पैसिफिक कमांड से बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) किया था। तब इसका मकसद भारत की बढ़ती भूमिका को प्रमुखता से दर्शाना था। लेकिन अब पेंटागन ने इसे फिर से पैसिफिक कमांड करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके पीछे ऐतिहासिक रूट और लीगेसी की वापसी का मुख्य तर्क दिया गया है।

क्या क्वाड से निकले भारत?

भू-राजनीतिक विशेषज्ञ आर. जगन्नाथन का मानना है कि अमेरिका से ज्यादा मनमानी करने वाला कोई और देश बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा है कि भारत को तुरंत अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने की सख्त शुरुआत करनी चाहिए। भारतीय नाविकों की हत्या पर भी अमेरिका ने कोई अफसोस नहीं जताया था जो उसकी नीयत को दिखाता है। ऐसे में भारत को अपनी आर्थिक संप्रभुता खुद हासिल करनी चाहिए।

भारत के लिए सीधा संदेश

जानकारों के अनुसार इस बदलाव का मतलब है कि अमेरिका को अब चीन को काउंटर करने के लिए भारत की पहले जैसी जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन का मुख्य फोकस अब पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र यानी ताइवान, जापान और फिलीपींस पर पूरी तरह केंद्रित हो गया है। अमेरिका भारत को महत्वपूर्ण तो मानता है लेकिन अपनी एशिया रणनीति को भारत-केंद्रित पहचान कभी नहीं देगा। पिछले साल ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ भी भारत पर थोपा था जो उनकी नीति को दर्शाता है।

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