ईरान जंग के बीच खुद को 'ईसा मसीह' का अवता बताने लगे ट्रंप, पोप लियो को लेकर दिया आपत्तिजनक बयान

Donald Trump ने ट्रुथ सोशल पर खुद को 'ईसा मसीह' के रूप में दिखाने वाली एक विवादित AI तस्वीर साझा की है। साथ ही उन्होंने पोप लियो की नीतियों को 'भयानक' बताते हुए उन पर तीखा हमला बोला।
Donald Trump Jesus Post
डोनाल्ड ट्रंप का विवादित पोस्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Donald Trump Jesus Post: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अक्सर सोशल मीडिया कुछ न कुछ ऐसा करते हैं जो विवाद का कारण बन जाता है। हाल ही में, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह खुद को ईसा मसीह के रूप में दिखा रहे हैं। यह तस्वीर एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाई गई लगती है, जिसमें ट्रंप एक बीमार व्यक्ति को चमत्कारी आशीर्वाद देते दिख रहे हैं। तस्वीर के बैकग्राउंड में अमेरिका का झंडा और कई अमेरिकी सैनिक फरिश्तों जैसे नजर आ रहे हैं, जबकि फाइटर जेट्स आसमान में उड़ते दिख रहे हैं। इस पोस्ट के जरिए ट्रंप ने खुद को एक मजबूत और शक्तिशाली नेता के रूप में पेश किया है।

पहले पोप लियो पर बोला था हमला

इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पोप लियो (कैथोलिक चर्च के प्रमुख) पर भी हमला किया। दरअसल पोप लियो ने हाल ही में ट्रंप की विदेश नीति और इमिग्रेशन नीतियों की आलोचना की थी, और यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोप पर तीखा निशाना साधा।

ट्रंप ने पोप लियो को "कमजोर" और "भयानक" बताया, खासकर अपराध और विदेश नीति के मुद्दों पर। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति में उनकी नीतियां भयानक हैं।"

MAGA समर्थक है पोप लियो के भाई

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने यह भी कहा कि पोप लियो अमेरिका में जन्मे हैं, इसीलिए वह पोप बने हैं। उन्होंने पोप लियो के भाई लुईस को ज्यादा पसंद किया, क्योंकि लुईस ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) विचारधारा का समर्थन करते हैं। ट्रंप ने कहा कि पोप लियो को अपने कट्टरपंथी विचारों को छोड़कर, अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और एक महान पोप बनने की कोशिश करनी चाहिए, न कि एक राजनेता।

इसके अलावा, ट्रंप ने रिपोर्टरों से बात करते हुए यह भी कहा कि वह पोप लियो के "बड़े फैन" नहीं हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने पोप को "लिबरल" बताते हुए कहा कि वह अपराध को रोकने में विश्वास नहीं करते। उनका यह बयान इरान जैसे देशों को लेकर था, जिनके परमाणु हथियारों के मामले पर ट्रंप का रुख सख्त रहा है।

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