

Machado gifts Nobel Prize to Trump Controversy: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरूवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान मचाडो ने अपना नोबेल पुरस्कार ट्रंप को सौंप दिया। इस कदम ने ध्यान खींचा, खासकर जब ट्रंप खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य बताते हुए इसकी वकालत कर रहे हैं। हालांकि, मचाडो के कदम की सोशल मीडिया से लेकर हर जगह आलोचना हो रही है। इसके अलावा लोग सवाल कर रहे हैं कि, क्या अब अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल पुरस्कार विजेता माना जाएगा। इसे लेकर क्या नियम है? इसके अलावा नोबेल के इतिहास में इससे पहले ऐसा कुछ हुआ है? यह घटनाक्रम नोबेल पुरस्कार के नियमों के तहत विवादस्पद हो सकता है, क्योंकि नोबेल पुरस्कार को किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच मीटिंग के बाद यह घोषणा की। उन्होंने समर्थकों से कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को अपना नोबेल पदक समर्पित किया, लेकिन ट्रंप ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। नोबेल पुरस्कार संस्थान ने इस मुद्दे पर अपने नियम स्पष्ट किए हैं। उनके अनुसार, नोबेल पुरस्कार का पदक और उपाधि केवल उस व्यक्ति के पास रहती है जिसे पुरस्कार मिला है। इसे न तो वापस लिया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है, और न ही किसी और को सौंपा जा सकता है।
इस संबंध में नोबेल पीस सेंटर सोशल मीडिया पर ने एक पुरानी जानकारी साझा की, जिसमें बताया गया कि नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल 6.6 सेंटीमीटर व्यास का और 196 ग्राम वजन का होता है, और यह सोने से बना होता है। इसके एक तरफ अल्फ्रेड नोबेल का चित्र और दूसरी तरफ तीन व्यक्ति कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं, जो भाईचारे का प्रतीक हैं। यह डिजाइन 120 वर्षों से अपरिवर्तित है।
नोबेल पुरस्कार के इतिहास में कुछ उदाहरण सामने आए हैं, जैसे दिमित्री मुरातोव का मेडल, जिसे यूक्रेन युद्ध में शरणार्थियों की मदद के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक में नीलाम कर दिया गया था। हालांकि, नोबेल संस्थान ने स्पष्ट किया है कि पुरस्कार की उपाधि किसी को हस्तांतरित नहीं की जा सकती, भले ही मेडल का मालिक बदल जाए। इस घटनाक्रम से यह संदेश मिलता है कि नोबेल पुरस्कार की उपाधि का सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है, चाहे मेडल किसी और के पास हो।