पोप और ट्रंप की जंग में कूदा ईरान, पेजेशकियान बोले- 'ईसा मसीह और शांति के दूत का अपमान बर्दाश्त नहीं'

Trump Pope Conflict Iran Support: पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के बीच ट्रंप और पोप लियो XIV में जुबानी जंग छिड़ गई है। ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने पोप का समर्थन करते हुए ट्रंप की आलोचना की है।
Iran Jumps into the Pope-Trump Feud; Pezeshkian Declares: 'Insult to Jesus Christ and the Messenger of Peace Will Not Be Tolerated'
राष्ट्रपति पेजेशकियान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Trump Pope Conflict Iran President Pezeshkian Statement: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो XIV के बीच छिड़ा विवाद अब एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दे में बदल गया है। इस विवाद में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की एंट्री ने मामले को और अधिक गरमा दिया है। पेजेशकियान ने पोप के समर्थन में उतरते हुए ट्रंप द्वारा किए गए अपमान की कड़े शब्दों में निंदा की है।

शांति की अपील और ट्रंप की नाराजगी

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के हालात बने। इस दौरान पोप लियो XIV ने लगातार शांति की अपील की और युद्ध के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। पोप ने स्पष्ट कहा कि किसी भी देश या उसकी जनता को खत्म करने की धमकी देना पूरी तरह गलत है और समस्याओं का समाधान बातचीत से ही निकलना चाहिए। उन्होंने ईश्वर के नाम पर युद्ध को सही ठहराने की भी आलोचना की।

पोप के इन शांति संदेशों पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर उन्हें 'कमजोर' और 'बेकार' करार दे दिया। ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा पोप पसंद नहीं है जो उनकी नीतियों की आलोचना करे।

ईरान ने किया पोप का बचाव

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पोप को संबोधित करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ईसा मसीह शांति और भाईचारे के प्रतीक हैं और उनकी तौहीन किसी भी आजाद इंसान को मंजूर नहीं होनी चाहिए। पेजेशकियान ने ईरान की जनता की ओर से इस अपमान की निंदा की और पोप को सम्मान का संदेश भेजा। यह घटना इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चरम तनाव के बावजूद ईरान ने एक ईसाई धर्मगुरु के मूल्यों का समर्थन किया है।

'मुझे ट्रंप से डर नहीं'

डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और अपमानजनक टिप्पणियों के बावजूद पोप लियो XIV ने बहुत शांत तरीके से जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे कोई राजनेता नहीं हैं और उनका काम केवल लोगों को जोड़ना और शांति का संदेश देना है। पोप ने जोर देकर कहा कि वे ट्रंप की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और अपना शांति का मिशन जारी रखेंगे।

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