Abraham Accords: ट्रंप ने इस्लामिक देशों पर दबाव डाला, ईरान डील को अब्राहम समित से जोड़ा

Abraham Accords Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को अब्राहम समझौते से जोड़ते हुए सभी इस्लामिक और खाड़ी देशों पर अपना भारी दबाव बना दिया है।
Abraham Accords: Trump Pressures Islamic Countries To Sign Deal For Iran Peace
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Trump Abraham Accords Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान के साथ चल रही शांति वार्ताओं के बीच एक बहुत बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को अब्राहम अकॉर्ड से जोड़कर खाड़ी देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमेरिका ने कड़ा संदेश दिया है कि शांति के लिए सभी देशों को एक साथ आना होगा। ट्रंप ने साफ किया है कि अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना मिडिल ईस्ट में पूरी तरह से शांति स्थापित करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल और नामुमकिन सा काम है।

ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र जैसे देश इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो अमेरिका पीछे हट सकता है। अगर ये इस्लामिक देश ऐसा नहीं करते हैं तो अमेरिका ईरान के साथ डील पर दोबारा विचार करेगा। कैबिनेट मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, कतर और अन्य देशों को तुरंत इस ऐतिहासिक समझौते में अपनी पूरी मर्जी से शामिल होना चाहिए।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इन सभी इस्लामिक देशों को अमेरिका के प्रति अपनी यह जिम्मेदारी निभानी होगी क्योंकि वे कर्जदार हैं। अगर ये सभी देश इस ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल होते हैं तो यह पूरी दुनिया के लिए बहुत ही शानदार कदम होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो अमेरिका इस शांति प्रक्रिया को मिडिल ईस्ट में पूरी तरह से सीमित भी कर सकता है। इस खास योजना को सफल बनाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर लगातार अपना काम कर रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ से पूछा कि क्या और देशों को इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए जोड़ा जा सकता है। इस पर विटकॉफ ने तुरंत जवाब दिया कि वे लोग इस बड़े लक्ष्य को पाने के लिए पूरी ताकत के साथ काम में जुटे हुए हैं।

अब्राहम अकॉर्ड का इतिहास

अब्राहम अकॉर्ड की शुरुआत साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान बहुत ही शानदार तरीके से हुई थी। इस बड़े समझौते का मुख्य मकसद इजरायल और सभी अरब देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंध बहुत मजबूती के साथ स्थापित करना था। सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इजरायल के साथ इस समझौते के तहत अपने संबंध पूरी तरह से सामान्य किए थे।

इस नए समझौते को साल 1979 में मिस्र और साल 1994 में जॉर्डन द्वारा इजरायल के साथ की गई शांति संधियों के बाद बहुत बड़ा माना जाता है। अमेरिका का ऐसा दावा है कि इस समझौते ने पूरे क्षेत्र में नए व्यापारिक रास्ते और बड़ी आर्थिक साझेदारी के कई नए द्वार खोले हैं। ट्रंप का मानना है कि इस अहम समझौते के व्यापक विस्तार से एक बहुत मजबूत और पूरी तरह से एकजुट मिडिल ईस्ट का निर्माण होगा।

खाड़ी देशों की चुनौतियां

ट्रंप भले ही इस समझौते को मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं लेकिन कई देशों के सामने राजनीतिक चुनौतियां हैं। सऊदी अरब ने बार-बार स्पष्ट किया है कि इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने से पहले फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना होगा। वहीं पाकिस्तान ने इजरायल को मान्यता देने या इस अब्राहम समझौते में शामिल होने की संभावनाओं को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है।

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