

Trishuli Tunnel Rescue Operation: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद नुवाकोट स्थित माथिल्लो त्रिशूली-3 'A' हाईड्रो पावर की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस अभियान में भारत की 11 सदस्यीय विशेष टीम भी शामिल हो गई है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
बाढ़ और भूस्खलन के कारण सुरंग के आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिससे बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। खराब मौसम और लगातार बने जोखिम के बावजूद राहत दल आधुनिक उपकरणों और तकनीकी तरीकों की मदद से अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
सुरंग में फंसे श्रमिकों तक पहुंचने के लिए संयुक्त तकनीकी टीम ने सुरंग के मुख्य हिस्से यानी ‘क्राउन हेड’ तक पहुंच बनाई। यहां पत्थरों और मलबे को हटाकर करीब 2×3 फीट का एक छोटा रास्ता तैयार किया गया। इसके बाद बचाव दल के जवान मजबूत रस्सियों की मदद से सावधानीपूर्वक सुरंग के अंदर उतरे।
अंदर पहुंचने के बाद जवानों ने फंसे कर्मचारियों को आवाज देकर संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, शुरुआती प्रयास में अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। स्थिति को देखते हुए बचाव दल ने बड़े कटिंग उपकरणों की व्यवस्था शुरू की। सुरंग का रास्ता चौड़ा करने के साथ सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने की तैयारी भी की जा रही है।
इस अभियान में नेपाली सेना के 66 जवान अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। इनके अलावा खोजी कुत्तों के साथ सशस्त्र पुलिस बल के 18 जवान और नेपाल पुलिस के 6 जवान भी अभियान में शामिल हैं। इस तरह सुरंग में संयुक्त रूप से करीब 90 सदस्यीय टीम रेस्क्यू कार्य में लगी है।
नेपाल सरकार ने व्यापक आपदा राहत अभियान के लिए देशभर में करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इन हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्री, भोजन और जरूरी दवाइयां पहुंचाने का काम जारी है।
सुरंग बचाव अभियान में भारत के अलावा चीन ने भी विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई है। चीन की छह सदस्यीय टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ टीम नेपाल पहुंचकर अभियान में मदद कर रही है। नेपाली सेना के अनुसार, अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे 191 कर्मचारियों को अब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
हालांकि, 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में 700 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में सड़कें, पुल, गांव और जलविद्युत परियोजनाओं का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में त्रिशूली सुरंग में चल रहा यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। भारत, चीन और नेपाल की संयुक्त टीमें अब सुरंग में फंसे लोगों तक सुरक्षित पहुंच बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।