

Transition Plan Iran: ईरान के अंतिम शाही राजवंश के वंशज रजा पहलवी ने इस्लामी गणराज्य के संभावित पतन के बाद देश का नेतृत्व करने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया है जो भविष्य की नीतियों पर काम करेंगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक उनकी तुलना वेनेजुएला की नेता मारिया कोरीना मचाडो से कर रहे हैं जिन्हें अमेरिकी समर्थन के बाद भी सत्ता नहीं मिली।
रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संदेश साझा करते हुए अपने देशवासियों को भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 'ईरान समृद्धि परियोजना' के तहत देश के शासन के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी रोडमैप विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान शासन के गिरने के बाद देश में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अराजकता पैदा न हो।
इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उन्होंने योग्य और विशेषज्ञ महिलाओं तथा पुरुषों की पहचान करने हेतु एक दूसरी टीम भी बनाई है। इस चयन प्रक्रिया और पूरी संक्रमणकालीन व्यवस्था की निगरानी के लिए गठित समिति का नेतृत्व वर्तमान में डॉक्टर सईद ग़ासेमिनेजाद कर रहे हैं। पहलवी का मानना है कि उनकी यह टीम सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि के अनुकूल परिस्थितियां स्थापित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
पहलवी राजवंश ने ईरान पर साल 1925 से लेकर 1979 तक शासन किया था और देश को एक आधुनिक और पश्चिम-उन्मुख राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस वंश की नींव रजा शाह पहलवी ने रखी थी जिन्होंने सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता संभाली और शिक्षा तथा बुनियादी ढांचे में सुधार किए। उनके बाद उनके बेटे मुहम्मद रजा शाह पहलवी ने कमान संभाली जिन्हें अक्सर 'ईरान के शाह' के रूप में जाना जाता है।
शाह के शासनकाल में ईरान ने 'सफेद क्रांति' के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक प्रगति की लेकिन उनकी तानाशाही नीतियों के कारण जनता में काफी असंतोष बढ़ गया था। 1979 की क्रांति के बाद शाह परिवार को निर्वासन में जाना पड़ा और वे वर्तमान में अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों में रह रहे हैं। रजा पहलवी अब उसी विरासत को आधुनिक लोकतांत्रिक ढांचे में वापस लाने का सपना देख रहे हैं।
रजा पहलवी की इस सक्रियता की तुलना अक्सर वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो से की जा रही है जिन्हें वहां की 'आयरन लेडी' कहा जाता है। मारिया को साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था और उन्होंने अपना मेडल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंपकर मदद की गुहार लगाई थी। उन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद वेनेजुएला की सत्ता उन्हें सौंप दी जाएगी।
हालांकि जब 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया तो पासा पलट गया। सत्ता मारिया को मिलने के बजाय मादुरो की करीबी डेल्सी रोड्रिग्ज के पास चली गई जो अब अमेरिका की नई पसंद बन चुकी हैं। यह घटनाक्रम रजा पहलवी के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि विदेशी समर्थन हमेशा सत्ता की गारंटी नहीं होता है।
ईरान में वर्तमान विरोध प्रदर्शनों के बीच रजा पहलवी का नाम अक्सर चर्चा में आता है लेकिन उनके लिए सत्ता की राह बिल्कुल भी आसान नहीं है। वह अक्सर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तारीफ करते हैं और खुद को ईरान में नई लोकतांत्रिक सत्ता के प्रबल दावेदार के रूप में पेश करते हैं। मगर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों के कारण उनकी योजनाएं कितनी सफल होंगी यह कहना फिलहाल मुश्किल है।
पहलवी की संक्रमणकालीन व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य वर्तमान शासन के पतन के तुरंत बाद सत्ता संभालना और देश में सुरक्षा बहाल करना है। उन्होंने दावा किया है कि देश के भीतर और बाहर से कई सक्षम व्यक्तियों ने उनके इस पुनर्निर्माण अभियान में शामिल होने की इच्छा जताई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान की जनता उन्हें स्वीकार करती है या वेनेजुएला की तरह सत्ता किसी तीसरे के हाथ चली जाएगी।