अब सिर्फ PoK नहीं, पूरे पाकिस्तान में विरोध की आग... 3 दिन में 40 मौतों से मचा हड़कंप; शहबाज-मुनीर के उड़े होश

PoK Protests: PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच JAAC ने आंदोलन को पूरे पाकिस्तान में फैलाने का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि सेना की कार्रवाई में अब तक 100 लोगों की जान जा चुकी है।
Now, the fire of protest has spread beyond PoK to all of Pakistan... 40 deaths in 3 days spark an uproar; Shehbaz and Munir are left stunned.
पाकिस्तान में उबल पड़ा लोगों का गुस्सा, AI मॉडिफाइड फोटो
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PoK Protests Death Toll: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिड़ा जनाक्रोश अब एक बड़े विद्रोह का रूप लेता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने घोषणा की है कि वह अपने इस आंदोलन को केवल PoK तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे पूरे पाकिस्तान में फैलाएगी।

संगठन ने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पिछले तीन दिनों के भीतर ही बल प्रयोग में 40 प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है।

पूरे पाकिस्तान में आंदोलन का आह्वान

JAAC के कोर कमेटी सदस्य सरदार अरमान कश्मीरी ने एक सार्वजनिक अपील जारी करते हुए कहा है कि यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ कश्मीर घाटी, जम्मू, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और पुंछ तक इस आंदोलन को अपना समर्थन दें।

संगठन का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों के बुनियादी हक जैसे मतदान का अधिकार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और न्याय के लिए लड़ा जा रहा है।

मौत का आंकड़ा 100 के पार?

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच जारी इस खूनी संघर्ष में मरने वालों की संख्या को लेकर चौंकाने वाले दावे किए जा रहे हैं। JAAC के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी के अनुसार, पिछले 52-53 दिनों में जारी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अब तक लगभग 100 लोगों की मौत हो चुकी है।

उनका आरोप है कि पाकिस्तानी सेना शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे निहत्थे लोगों पर सीधे गोलियां चला रही है, जिसमें सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इन आंकड़ों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

पीओके में क्या है जमीनी हालात?

इलाके में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि प्रशासन ने संचार माध्यमों पर कड़ा पहरा लगा दिया है। PoK के कई हिस्सों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। JAAC का आरोप है कि सूचनाओं को दबाने के लिए कम्युनिकेशन ब्लैकआउट किया गया है ताकि दुनिया को वहां हो रहे मानवाधिकार हनन का पता न चल सके।

क्या है आगे की रणनीति?

JAAC ने बताया कि इस्लामाबाद के प्रसिद्ध डी-चौक पर उनका धरना अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन के नेताओं के अनुसार, 'लॉन्ग मार्च' को केवल अस्थायी रूप से इसलिए रोका गया है ताकि मारे गए साथियों का अंतिम संस्कार किया जा सके और घायलों का उपचार हो सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि शोक की प्रक्रिया पूरी होते ही यह आंदोलन पहले से कहीं अधिक उग्र और व्यापक स्तर पर फिर से शुरू किया जाएगा।

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