

MQM-P Protest Threat to Shehbaz Sharif Govt: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। हाल ही में पाकिस्तान की सरकार में शामिल पार्टी मानी जाने वाली मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) शहबाज सरकार को धमकी दी है कि अगर उनसे किए गए वादे पूरे नहीं किए गए, तो उनकी पार्टी पूरे सिंध में सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगी।
एमक्यूएम-पी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार में गठबंधन सहयोगी है। पाकिस्तान के प्रसिद्ध अखबार डॉन के मुताबिक एमक्यूएम-पी ने आरोप लगाया है कि 2022 में हुए 18-सूत्रीय समझौते को अब तक लागू नहीं किया गया। पार्टी का कहना है कि यह समझौता सरकार बनाने से पहले राजनीतिक सहमति का हिस्सा था, जिसमें स्थानीय शासन, नौकरियों में कोटा प्रणाली और संसाधनों के बंटवारे जैसे अहम मुद्दे शामिल थे।
कराची में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एमक्यूएम-पी के वरिष्ठ नेता फारूक सत्तार ने इसे अंतिम चेतावनी बताया और कहा, अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो पार्टी ऐसा विरोध आंदोलन शुरू करेगी जिसे रोकना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने न तो प्रांतीय सरकार में हिस्सेदारी मांगी और न ही अतिरिक्त अधिकार, बल्कि केवल अपने समझौते को लागू करने की मांग कर रही है।
सत्तार ने यह भी दावा किया कि समझौते के गारंटर के तौर पर शहबाज शरीफ स्वयं शामिल थे, इसलिए अब केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसे लागू कराए। उन्होंने कहा कि 18 में से एक भी बिंदु अब तक लागू नहीं हुआ है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 149 का हवाला देते हुए संघीय हस्तक्षेप या जनमत संग्रह की मांग भी उठाई। साथ ही कराची में स्थानीय सरकार व्यवस्था, फर्जी डोमिसाइल और सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली खत्म करने की मांग दोहराई गई।
एमक्यूएम-पी सिंध प्रांत में विपक्ष की भूमिका निभा रही है। पार्टी का कहना है कि कराची और अन्य शहरी क्षेत्रों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। सरकार की एक सहयोगी पार्टी का इस तरह खुलकर विरोध करना शहबाज सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है और गठबंधन के भीतर असंतोष को भी उजागर करता है।