ताज उतारो, जोकर...ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता, न्यूयॉर्क से लेकर लंदन तक लगे सत्ता छोड़ो के नारे- VIDEO

US-Iran War: ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध के खिलाफ अमेरिका के सभी 50 राज्यों सहित यूरोप में 'नो किंग्स' रैलियों का सैलाब उमड़ पड़ा। महंगाई और सैन्य कार्रवाई के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर हैं।
No Kings Protest Against Donald Trump
अमेरिका-यूरोप में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

No Kings Protest Against Donald Trump: शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों और यूरोप के कई हिस्सों में 'नो किंग्स' रैलियों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ईरान के खिलाफ युद्ध के विरोध में आयोजित की गईं। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, प्रदर्शनकारी कई मुद्दों पर अपना गुस्सा व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए। अमेरिका से लेकर यूरोप के कई देशों में प्रदर्शनकारियों ने "ताज नीचे रखो, जोकर" जैसे नारों के माध्यम से ट्रंप प्रशासन की आलोचना की। मिनेसोटा का सेंट पॉल, जहां कैपिटल लॉन पर हजारों लोग जुटे, इन रैलियों का मुख्य केंद्र रहा।

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई कई हस्तियां

डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ रैली में रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन भी शामिल हुए। उन्होंने संघीय एजेंटों द्वारा मारे गए रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की याद में लिखा गया गीत "स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस" प्रस्तुत किया। इसके अलावा, हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो, जेन फोंडा, गायिका जोआन बैज और सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी रैली को संबोधित किया।

न्यूयॉर्क, मैनहट्टन से लेकर छोटे कस्बे ड्रिग्स तक, लगभग 3,100 कार्यक्रम आयोजित किए गए। अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, जबकि लॉस एंजेल्स में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा संघीय हिरासत केंद्र के पास वस्तुएं फेंकने के बाद पुलिस ने आंसू गैस का उपयोग किया। वाशिंगटन डीसी में, सैकड़ों लोग लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च करते हुए "कोई राजा नहीं" के नारों के साथ पहुंचे।

ट्रंप प्रशासन से क्यों गुस्सा है जनता?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी जनता की नाराजगी के मुख्य कारण तीन हैं:

  1. महंगाई और ईंधन की कीमतें: मिडिल ईस्ट की जंग और तेल की बढ़ती कीमतें आम आदमी की जेब पर असर डाल रही हैं।
  2. कड़े इमिग्रेशन नीतियां: संघीय एजेंटों द्वारा की जा रही छापेमारी और हिंसा लोगों में डर पैदा कर रही हैं।
  3. ईरान युद्ध: अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के खिलाफ हाल ही में शुरू किए गए युद्ध से 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। आम जनता इस युद्ध को रोकने की मांग कर रही है।

ट्रंप के समर्थन में आगे रिपब्लिकन

रिपब्लिकन नेताओं ने रैलियों की कड़ी आलोचना की। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इसे वामपंथी फंडिंग नेटवर्क का काम बताया और कहा कि इन प्रदर्शनों को जनता का वास्तविक समर्थन नहीं प्राप्त है। नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता मौरीन ओ'टूल ने इन रैलियों को "अमेरिका विरोधी और वामपंथी हिंसक कल्पनाओं का मंच" करार दिया।

यूरोप में भी हो रहे प्रदर्शन

ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं थे। रोम में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आलोचना की और ईरान से जुड़ी हालिया सैन्य कार्रवाइयों का विरोध किया। लंदन में, प्रदर्शनकारियों ने "धुर दक्षिणपंथ को रोको" और "नस्लवाद के खिलाफ खड़े हो जाओ" के नारों के साथ मार्च किया। पेरिस में, विदेशों में रहने वाले अमेरिकियों सहित सैकड़ों लोग बैस्टिल में जमा हुए।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com