न्यूयॉर्क में बोले संघ प्रमुख, राजनीति बनी स्वार्थ का खेल, समाज के बदलाव से ही संभव है समाधान

Mohan Bhagwat In New York: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि हर समस्या का समाधान मैं और मेरा में नहीं, बल्कि हम व हमारा के भाव में है। सच्चा धर्म बाहरी कर्मकांड नहीं, बल्कि सत्य की खोज है।
RSS Chief Mohan Bhagwat
मोहन भागवतसोर्स- सोशल मीडिया
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Mohan Bhagwat Universal Oneness Program : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित 'एक दुनिया, एक मानवता' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रत्येक मनुष्य का अपना सम्मान है और मनुष्यों में कोई भेद नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो वास्तविकता सदा बनी रहती है, वह यह है कि हम सब एक हैं। संघ प्रमुख के अनुसार, जहां 'मैं और मेरा' का भाव होता है, वहां किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता; दुनिया का वास्तविक समाधान केवल 'हम और हमारा' के भाव में ही निहित है।

राजनीति अब बन गई है 'स्वार्थ का खेल'

कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हमें अपना संविधान मिला और उसमें इस बात (हम सब एक हैं) पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा वास्तव में नहीं हो रहा है क्योंकि ये चीजें केवल राजनीति से नहीं होतीं। उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि राजनीति अब स्वार्थ का खेल बन गई है"। उनके अनुसार, राजनीति के माध्यम से इसका समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए हमें समाज से शुरुआत करनी होगी। उन्होंने जानकारी दी कि भारत में इस सामाजिक बदलाव की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है, और साल 2018 में उनके एक भाषण के बाद इस पर कई लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।

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उंगली पर नहीं, रोशनी पर टिकाएं नजर

धर्म के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज की दुनिया में धर्मों को काफी हद तक केवल बाहरी अनुष्ठानों द्वारा परिभाषित किया जाता है। उन्होंने माना कि धार्मिक अनुशासन का पालन करने और दिव्यता के मार्ग पर चलने के लिए अनुष्ठानों का यह अनुशासन भी आवश्यक है। लेकिन धर्म का असली उद्देश्य हमें सत्य की ओर ले जाना है।

इसे एक सुंदर उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए उन्होंने कहा, "यदि मैं उस प्रकाश की ओर इशारा करूं, तो आप मेरी उंगली को इशारा करते हुए देखेंगे और फिर प्रकाश को देखेंगे। लेकिन यदि आप केवल मेरी उंगली पर ही टकटकी लगाए रहेंगे, तो आप प्रकाश को कभी नहीं देख पाएंगे"। धर्म का अंतिम उद्देश्य इसी प्रकार उस परम सत्य और दिव्यता की खोज करना है, जिसे हम सभी अलग-अलग नामों से पुकारते हैं।

निस्वार्थ सेवा देना ही संघ की छवि

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में फैली भ्रांतियों पर बेबाकी से बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ के लोग बदले में कुछ भी पाने की उम्मीद नहीं रखते। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल दूसरों को यह नहीं कहते कि वे कुछ पाने की उम्मीद न करें, बल्कि संघ में इसका अभ्यास स्वयं करते हैं। उन्होंने कहा, "हम केवल देते हैं और हमें बदले में कुछ नहीं चाहिए"। उन्होंने आगे कहा कि इसी निस्वार्थ भावना और प्रचार-प्रसार से दूरी के कारण संघ पब्लिसिटी के मामले में बहुत पीछे रह जाता है, जिसके चलते कई तरह की गलत धारणाएं समाज में फैल जाती हैं। उन्होंने भरोसा दिया कि जब लोग स्वयं आकर संघ को भीतर से देखेंगे, तो उनकी वे सभी गलत धारणाएं एक ही दिन में दूर हो जाएंगी।

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हिंदू धर्म की असली परिभाषा

संघ प्रमुख ने भारतीय परंपरा के सर्वसमावेशी चरित्र को रेखांकित करने के लिए स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि रामकृष्ण परमहंस ने भारतीय मूल के धर्मों के साथ-साथ इस्लाम और ईसाई धर्म सहित सभी प्रमुख धर्मों का पालन पूजा के अंतिम चरण तक किया और इन सभी मार्गों के माध्यम से प्राप्त होने वाले परम अनुभव को प्राप्त किया।

हिंदू धर्म की सच्ची परिभाषा को स्पष्ट करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि आप स्वयं को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और प्रत्येक मनुष्य का अपना सम्मान है।

वैश्विक स्तर पर संवाद की आवश्यकता

भविष्य की रूपरेखा पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि अब हमें अपने लोगों को निर्देशित करना शुरू करना चाहिए। उन्होंने इस संवाद को केवल देश तक सीमित न रखकर सभी देशों में, उनके प्रांतों में, जिला स्तर पर और ब्लॉक स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास करने की बात कही। उनका मानना है कि यदि हम ऐसा करते हैं, तो पूरे समाज का माहौल बदल जाएगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो-तीन सत्रों में उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है और यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सभी लोग एक ही दिशा में सोच रहे हैं।

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