मिडिल ईस्ट की सुरक्षा बाहरी लोगों की जिम्मेदारी नहीं... ईरानी विदेश मंत्री अराघची का बड़ा बयान

Middle East Security: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मिडिल ईस्ट की सुरक्षा क्षेत्र के देशों की आपसी बातचीत और विकास सहयोग से हासिल होगी, न कि विदेशी ताकतों की सैन्य मौजूदगी से।
Middle East Security Iran Statement
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची(सोर्स- IANS)
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Middle East Security Iran Statement: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ग्लोबल टाउन हॉल 2026 फोरम में मिडिल ईस्ट सुरक्षा पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल इस क्षेत्र के देशों की है, न कि किसी बाहरी ताकत की।

अराघची ने दुनिया से सैन्यवाद और सैन्य मौजूदगी छोड़कर सतत विकास व राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युद्ध में मारे गए लोग केवल आंकड़े नहीं होते, बल्कि आम नागरिक अपनी जिंदगी और भविष्य की भारी कीमत चुकाते हैं।

ग्लोबल टाउन हॉल 2026 में अब्बास अराघची का संबोधन

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वर्चुअल माध्यम से आयोजित ग्लोबल टाउन हॉल 2026 फोरम को संबोधित किया। इस प्रोग्राम का आयोजन फॉरेन पॉलिसी कम्युनिटी ऑफ इंडोनेशिया यानी FPCI की ओर से किया गया था।

इस साल कॉन्फ्रेंस का टॉपिक ‘ग्लोबल यू-टर्न अपील: रिसेंट्रिंग डेवलपमेंट, रिक्लेमिंग ह्यूमैनिटी, रिस्टोरिंग जस्टिस इन अ क्रेजियर वर्ल्ड’ रखा गया था। अपने संबोधन में अराघची ने ग्लोबल कम्युनिटी से मिलिटेरिज्म से दूर रहने और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को प्रायोरिटी देने की अपील की।

उन्होंने नेशनल सॉवरेन्टी के सम्मान और ह्यूमन वैल्यूज को इंटरनेशनल रिलेशंस का महत्वपूर्ण आधार बताया। अराघची ने कहा कि बदलती दुनिया में डेवलपमेंट, ह्यूमैनिटी और जस्टिस को सेंटर में रखने की जरूरत है।

मिडिल ईस्ट की सिक्योरिटी पर ईरान का रुख

अराघची ने मिडिल ईस्ट की सिक्योरिटी को लेकर कहा कि रीजन में परमानेंट पीस और सिक्योरिटी किसी बाहरी पावर की मिलिट्री प्रेजेंस से हासिल नहीं की जा सकती। उनके अनुसार इस रीजन के देशों को अपनी सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी के लिए आपसी बातचीत को प्रायोरिटी देनी चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्री ने डायलॉग, ट्रस्ट बिल्डिंग, कोऑपरेशन और म्यूचुअल रिस्पेक्ट को रीजनल पीस का आधार बताया। उन्होंने कहा कि फॉरेन पावर्स की मिलिट्री प्रेजेंस या किसी बाहरी पक्ष की इच्छा थोपने से परमानेंट सिक्योरिटी सुनिश्चित नहीं हो सकती।

उनके बयान में रीजनल देशों के बीच कोऑपरेशन और नेशनल सॉवरेन्टी के सम्मान पर विशेष जोर रहा। ईरान लंबे समय से मिडिल ईस्ट में फॉरेन मिलिट्री इंटरवेंशन के खिलाफ अपना रुख रखता आया है।

वॉर की ह्यूमैनिटेरियन कॉस्ट पर उठाया सवाल

अराघची ने अपने संबोधन में वॉर के ह्यूमैनिटेरियन इम्पैक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युद्ध में जान गंवाने वाले लोग सिर्फ आंकड़े नहीं होते। हर मौत के पीछे एक परिवार, एक फ्यूचर और एक पूरी जिंदगी होती है।

उन्होंने कहा कि कॉन्फ्लिक्ट्स के कारण आम नागरिकों को अपनी जान, घर और सिक्योरिटी की कीमत चुकानी पड़ती है। उनके मुताबिक, वॉर का इम्पैक्ट केवल वॉर जोन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर सोसाइटी और आने वाली जेनरेशन तक पहुंचता है।

अब्बास अराघची ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से सवाल किया कि वायलेंस और कॉन्फ्लिक्ट्स का सिलसिला आखिर कब तक जारी रहेगा। उन्होंने पीस की दिशा में सीरियस एफर्ट करने की जरूरत पर जोर दिया।

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सस्टेनेबल डेवलपमेंट और रीजनल डायलॉग पर जोर

ईरानी विदेश मंत्री ने ग्लोबल कम्युनिटी से मिलिटेरिज्म और एक्सटर्नल इंटरवेंशन की पॉलिसीज से आगे बढ़कर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि नेशनल सॉवरेन्टी और रीजनल देशों के राइट्स का सम्मान जरूरी है।

अराघची के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में सेफ फ्यूचर बनाने के लिए रीजनल देशों के बीच लगातार डायलॉग और कोऑपरेशन जरूरी है। इसके साथ ही डेवलपमेंट और ह्यूमैनिटेरियन वैल्यूज को प्रायोरिटी देकर परमानेंट पीस की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि रीजन के देश आपसी बातचीत और कोऑपरेशन के जरिए सिक्योरिटी तथा डेवलपमेंट के लिए साझा रास्ता तैयार कर सकते हैं।