मौत से घबराए खामेनेई! इजरायल-ईरान जंग के बीच चुन लिए सत्ता के वारिस, बंकर में छिपकर ले रहे फैसले

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने इजरायल के साथ चल रहे तनाव के बीच सुरक्षित बंकर में रहकर अपने तीन उत्तराधिकारी चुन लिए हैं। वह इलेक्ट्रॉनिक संचार से दूर रह रहे हैं ताकि उनकी सटीक लोकेशन का पता न चल सके।
मौत से घबराए खामेनेई! इजरायल-ईरान जंग के बीच चुन लिए सत्ता के 3 वारिस, बंकर में छिपकर ले रहे फैसले
अयातुल्लाह खामेनेई, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

तेहरान: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के बीच तेहरान से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई अब एक सुरक्षित बंकर में रहकर युद्ध की रणनीति बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने न केवल सैन्य कमांडरों की संभावित मौत के मद्देनजर उनके विकल्प तैयार किए हैं, बल्कि अपने उत्तराधिकारी के रूप में तीन वरिष्ठ धार्मिक नेताओं के नाम भी गुप्त रूप से तय कर लिए हैं।

ईरानी अधिकारियों ने सिर्फ इतना ही जानकारी दी है कि उत्तराधिकारी के लिए तीन लोगों के नाम चुने गए हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वे तीनों कौन हैं। अब हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि अयातुल्लाह खामेनेई का उत्तराधिकारी किसे बनाया जा सकता है। संभावित उम्मीदवारों में पहला नाम अलीरेजा अराफी, दूसरा नाम अली असगर हेजाजी, जबकि तीसरे उम्मीदवार के रूप में हासिम हुसैनी बुशहरी का नाम सामने आ रहा है।

हमलों के बाद से माहौल काफी तनावग्रस्त

ईरान की राजधानी तेहरान में इजरायल के अचानक और भीषण हमलों के बाद माहौल काफी तनावग्रस्त है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक संचार प्रणाली का उपयोग नहीं कर रहे हैं। वह सैन्य अधिकारियों के साथ केवल एक विश्वसनीय दूत के माध्यम से ही संपर्क स्थापित कर रहे हैं, ताकि उनकी स्थिति का पता न लगाया जा सके। यह स्थिति दर्शाती है कि ईरानी शीर्ष नेतृत्व खुद को एक बड़े युद्ध के केंद्र में मान रहा है। ‘हमें ईरान जैसा हश्र नहीं चाहिए…’ तेहरान का हाल देख कांपे एर्दोगन, हथियारों को लेकर कह दी ये बात

खामेनेई को सता रहा है मौत का डर

यह पहली बार है जब सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अपने उत्तराधिकारी की योजना सार्वजनिक रूप से तैयार की है, हालांकि यह प्रक्रिया गोपनीय तरीके से की गई है। यह महज एक रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि उस गहरे डर को भी दर्शाता है जो 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध के दौरान भी नहीं देखा गया था। अधिकारियों की मानें तो यह कदम इस ओर इशारा करता है कि खामेनेई अब इस संभावना को स्वीकार करने लगे हैं कि वर्तमान युद्ध में उनकी अपनी जान भी जा सकती है।

इजरायल द्वारा पिछले शुक्रवार से किए जा रहे हमले अब तक के सबसे भीषण और विनाशकारी हमले साबित हो रहे हैं। ये हमले ईरान-इराक युद्ध की तुलना में भी कहीं अधिक घातक हैं। मात्र कुछ दिनों में ही तेहरान को इतनी क्षति पहुंची है जितनी इराक और सद्दाम हुसैन पूरे आठ वर्षों तक भी नहीं पहुंचा पाए थे।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com