

Falling Birth Rate In Japan: जापान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से गुजर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दशकों में पहली बार जापान की आबादी 12 करोड़ के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 11.97 करोड़ रह गई है। जापान के आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट बताती है कि देश में जन्मदर में रिकॉर्ड गिरावट और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
मंत्रालय के सर्वे के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 तक जापान के मूल नागरिकों की संख्या 11.97 करोड़ (119.74 मिलियन) दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.76% कम है। गौरतलब है कि 2009 में अपनी चरम सीमा पर पहुंचने के बाद से जापान की आबादी में पिछले 17 वर्षों से निरंतर गिरावट देखी जा रही है। 1968 में जब से इस जनसंख्या डेटा का रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ है, तब से यह स्थिति सबसे चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है।
जापान में नए बच्चों के जन्म का आंकड़ा अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पिछले एक साल में पैदा होने वाले बच्चों की संख्या में लगभग 15,000 की कमी आई है, जिससे यह कुल आंकड़ा महज 6,70,000 के करीब रह गया है। यह 1899 के बाद से जन्म का सबसे कम वार्षिक आंकड़ा है। इसके साथ ही देश की कुल प्रजनन दर भी गिरकर 1.14 रह गई है, जो लगातार 10वें साल की गिरावट दर्शाती है।
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जहां मूल जापानियों की संख्या घट रही है, वहीं देश में रहने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में जापान में विदेशी निवासियों की आबादी 9.62% बढ़कर 40.3 लाख (4.03 मिलियन) हो गई है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 4 प्रतिशत से अधिक है।
विदेशी नागरिकों की इस बढ़ोतरी में टोक्यो, ओसाका और सैतामा जैसे शहरों की प्रमुख भूमिका रही है। विशेष रूप से होक्काइडो के कुत्चान जैसे इलाकों में स्की रिसॉर्ट्स और विदेशी कर्मचारियों की वजह से सबसे ज्यादा वृद्धि दर देखी गई है।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, जापान (औसत उम्र 49.9 साल) मोनाको के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बुजुर्ग आबादी वाला देश बन चुका है। इस डेमोग्राफिक शिफ्ट के कारण जापान को लेबर की भारी कमी, टैक्स बेस का सिकुड़ना और सोशल सिक्योरिटी बिल में भारी बढ़ोतरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
जनसंख्या बढ़ाने के प्रयासों के तहत टोक्यो सरकार ने टोक्यो एनमुसुबी नाम से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटिंग ऐप लॉन्च किया है। सितंबर 2024 में शुरू हुए इस ऐप की मदद से अब तक 265 जोड़ों की शादी हो चुकी है और 760 जोड़े गंभीर रिश्तों में हैं। सरकार का उद्देश्य उन युवाओं को प्रोत्साहित करना है जो शादी के लिए सक्रिय रूप से पार्टनर नहीं तलाश पा रहे हैं।