गाजा में चला बुलडोजर, इजरायल ने रौंदी ब्रिटिश-ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की कब्रें; दुनिया भर में आक्रोश

Gaza War Cemetery Bulldozed: गाजा में इजरायल ने प्रथम-द्वितीय विश्व युद्ध के ब्रिटिश-ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के कब्रिस्तान को बुलडोजर से नष्ट कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया।
Bulldozers deployed in Gaza, Israel desecrates graves of British and Australian soldiers; outrage erupts worldwide.
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों की कब्रें, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Israel Gaza Latest News In Hindi: गाजा में चल रहे युद्ध के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने दुनिया भर के इतिहास प्रेमियों और सेनाओं को झकझोर कर रख दिया है। सेटेलाइट तस्वीरों और चश्मदीदों के बयानों से खुलासा हुआ है कि इजरायली रक्षा बलों ने गाजा शहर के अल-तुफाह जिले में स्थित उस ऐतिहासिक युद्ध कब्रिस्तान के एक हिस्से को बुलडोजर से रौंद दिया है जहां प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई और अन्य मित्र देशों के सैनिकों की कब्रें थीं।

सेटेलाइट तस्वीरों में दिखा तबाही का मंजर

तस्वीरों को देखकर पता चलता है कि कब्रिस्तान के दक्षिणी कोने में बड़े पैमाने पर खुदाई की गई है। जहां पिछले साल मार्च तक सब कुछ सामान्य था वहीं दिसंबर की तस्वीरों में कब्रों की कतारें गायब हैं और मिट्टी को बुरी तरह खोदकर बड़े-बड़े ढेर बना दिए गए हैं। यह कार्य भारी मशीनों और बुलडोजरों के जरिए बेहद व्यवस्थित तरीके से किया गया प्रतीत होता है।

कौन से देशों के सैनिकों की कब्रें हुईं प्रभावित?

कॉमनवेल्थ वार ग्रेव्स कमीशन के अनुसार, इस कब्रिस्तान में द्वितीय विश्व युद्ध के 100 से अधिक मित्र देशों के सैनिकों की कब्रें थीं, जिनमें अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई थे और कुछ ब्रिटिश व पोलिश सैनिक भी शामिल थे। इसके अलावा, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फिलिस्तीन को तुर्की सेना से मुक्त कराते समय शहीद हुए ब्रिटिश सैनिकों के चार सेक्शन भी पूरी तरह जमींदोज कर दिए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यहां स्थित भारतीय यूएन मेमोरियल और हिंदू, मुस्लिम व तुर्की अनुभागों को भी नुकसान पहुंचा है।

इजरायल की सफाई

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायली सेना ने कहा कि उन्हें युद्ध की परिस्थितियों में 'रक्षात्मक उपाय' करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक प्रवक्ता के अनुसार, यह क्षेत्र एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र था और आतंकवादियों ने कब्रिस्तान के पास की इमारतों में शरण लेकर सेना पर हमला करने की कोशिश की थी। सेना ने दावा किया कि कब्रिस्तान के नीचे और आसपास 'आतंकवादी बुनियादी ढांचा' (सुरंगें) होने की पहचान की गई थी जिसे नष्ट करना सैनिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य था।

इतिहासकारों और परिजनों का दुख

कब्रिस्तान के पूर्व केयरटेकर एसाम जरदाह ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि मैं वैसा ही दुख महसूस कर रहा हूं जैसे किसी बच्चे ने अपनी मां को खो दिया हो। सैन्य इतिहासकारों का कहना है कि ये कब्रिस्तान केवल पत्थर नहीं बल्कि उन सैनिकों की यादें और बलिदान के प्रतीक हैं जिन्होंने दुनिया की शांति के लिए जान दी। हालांकि अक्टूबर में संघर्ष विराम हुआ था लेकिन गाजा में 'येलो लाइन' के आसपास तनाव अब भी जारी है और रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष विराम के बाद से अब तक 500 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।

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