'खून देंगे पर जमीन नहीं' ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिका को दी चेतावनी

Long War Preparedness: ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन नहीं देंगे लेकिन लंबे युद्ध के लिए तैयार हैं। उन्होंने बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया।
'Ready to Shed Blood but Not Land', Iran's Representative Warns US of Long-Term War Resistance
ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran Rejects US Talk Offer: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ किया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के पक्ष में नहीं है। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान लंबे समय तक युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान अपने विरोधियों के सामने कभी नहीं झुकेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करता रहेगा। ईरानी प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया है कि देश की जनता अपने स्वाभिमान और जमीन की रक्षा के लिए हर तरह का बलिदान देने का संकल्प ले चुकी है।

बातचीत की संभावना खारिज

इलाही ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि तेहरान अब बातचीत के लिए बेताब है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों में वार्ता का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि यह पूरा संघर्ष अमेरिका की एकतरफा कार्रवाइयों की वजह से शुरू हुआ है। अतीत के कड़वे अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि जब भी बातचीत की कोशिश हुई तब ईरान पर पीछे से हमले किए गए थे।

लंबे संघर्ष का अनुभव

ईरान का कहना है कि वे किसी भी दबाव में आने वाले नहीं हैं और उनके पास लंबे समय तक युद्ध झेलने का काफी पुराना अनुभव है। उन्होंने याद दिलाया कि ईरान और इराक के बीच चला आठ वर्षों का भीषण युद्ध उनके साहस और धैर्य की मिसाल के रूप में दुनिया के सामने है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो ईरान कई वर्षों तक इस सैन्य टकराव को जारी रखने की क्षमता और संसाधन दोनों ही रखता है।

जनता का कड़ा प्रतिरोध

ईरानी प्रतिनिधि के अनुसार आज भी ईरान की सड़कों पर आम नागरिकों के बीच भारी गुस्सा और अपनी रक्षा का अटूट भाव साफ नजर आता है। लोग सार्वजनिक रूप से यह कह रहे हैं कि वे अपने देश के लिए अपना खून देने को तैयार हैं लेकिन अपनी एक इंच जमीन नहीं देंगे। यह जनाक्रोश और प्रतिरोध का भाव ही ईरान की सबसे बड़ी ताकत है जो उसे किसी भी बाहरी आक्रमण के सामने झुकने नहीं देगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

ईरान ने चेतावनी दी है कि यह संकट केवल उन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया के बाजारों पर बहुत बुरा पड़ेगा। ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कारण गैस और तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है जिससे वैश्विक महंगाई काफी बढ़ जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार पहले से ही अस्थिर हैं और इस टकराव के बढ़ने से पेट्रोल और ईंधन की आपूर्ति में बड़ा व्यवधान पैदा हो सकता है।

शांति की नाकाम अपील

ईरान का दावा है कि उसने शुरू से ही क्षेत्र में शांति बनाए रखने और बड़े युद्ध को टालने की कई बार कोशिशें और अपील की थीं। तेहरान ने पड़ोसी देशों से भी आग्रह किया था कि वे मिलकर इस बिगड़ते हालात को काबू में करें क्योंकि यह क्षेत्र और युद्ध नहीं झेल सकता। फरवरी के अंत में शुरू हुए इस संघर्ष ने तब और भी भयानक मोड़ ले लिया जब हमलों में सर्वोच्च नेता की मौत हो गई।

देश की सुरक्षा प्राथमिकता

इलाही ने विश्व समुदाय से भी अपील की है कि वह स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाना शुरू करे। ईरान का कहना है कि उसे दूसरों को परेशानी में देखकर कोई खुशी नहीं होती लेकिन अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करना उसकी मजबूरी है। ईरान अपने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा और अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव सैन्य और राजनीतिक विकल्प का उपयोग जारी रखेगा।

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