

Iran Airspace Reopening Plan: ईरान ने मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बाद एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सुरक्षा कारणों से बंद किए गए एयरस्पेस को फिर से खोलने की पूरी तैयारी की जा रही है। ईरान प्रशासन इस ईरान के हवाई क्षेत्र को फिर से खोलने की योजना को पूरी तरह से लागू करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली राहत लेकर आएगा।
Iran का नागरिक उड्डयन संगठन अपने बंद एयरस्पेस और एयरपोर्ट को दोबारा खोलने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से चार अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। इस बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के डिप्टी हेड ने कर दी है।
अमेरिका और इजरायल के बीच हुए हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से यह बड़ा कदम उठाया गया था। नागरिक विमानों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 28 फरवरी से एयरस्पेस को पूरी तरह बंद रखा गया था। अब युद्ध का तनाव कुछ कम होने के बाद इसे दोबारा सुरक्षित रूप से खोला जा रहा है।
इस योजना के पहले चरण में उन ट्रांजिट उड़ानों को मंजूरी मिलेगी जो सीधे Iran के ऊपर से गुजरती हैं। इसके ठीक बाद दूसरे चरण में देश के पूर्वी हिस्से में मौजूद सभी एयरपोर्ट्स का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। नागरिक उड्डयन संगठन हर तरह की सुरक्षा का पूरा जायजा लेने के बाद ही अपने अगले कदम उठा रहा है।
तीसरे चरण में राजधानी तेहरान के दो सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त हवाई अड्डों को चालू किया जाएगा। इनमें मेहराबाद और इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं जो देश में विमानन के मुख्य केंद्र हैं। इन दोनों प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ानों की आवाजाही को सामान्य करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो चुकी है।
सबसे अंत में यानी चौथे चरण के दौरान देश के पश्चिमी हिस्से के हवाई अड्डों को पूरी तरह से खोला जाएगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी अब इस पूरे एयरस्पेस को उड़ानों के लिए सुरक्षित मान रहे हैं। इसलिए पूरी सावधानी और सतर्कता बरतते हुए सभी हवाई सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा रहा है।
Iran का रास्ता बंद होने के कारण दुनिया भर की अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था। Iranस रकार के इस नए फैसले से इन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बहुत बड़ी और जरूरी राहत मिलने वाली है। हवाई यातायात धीरे-धीरे अपनी पटरी पर लौटेगा जिससे समय और विमानों के ईंधन दोनों की भारी बचत होगी