Henley Passport Index 2026: भारत की रैंकिंग में सुधार, पड़ोसी देशों का पासपोर्ट सबसे फिसड्डी

Henley Passport Index 2026: हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत 80वें स्थान पर पहुंचा, जिससे 55 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलेगी। वहीं भारत के 4 पड़ोसी देशों के पासपोर्ट सबसे कमजोर रहे हैं।
Henley Passport Index 2026: India Ranks 80th Globally, Neighbors Among Worlds Weakest Passports
भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार, पड़ोसी देशों का पासपोर्ट सबसे फिसड्डी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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India rank in Henley Passport Index 2026: हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक स्थिति में सराहनीय सुधार दर्ज किया गया है। भारत अब विश्व रैंकिंग में 80वें स्थान पर पहुंच गया है, जो पिछले साल के 85वें पायदान के मुकाबले पांच अंकों की महत्वपूर्ण बढ़त है। हालांकि, भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और अफगानिस्तान के पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर दस्तावेजों की सूची में शामिल हैं। यह सूचकांक अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) के डेटा पर आधारित है, जो वैश्विक गतिशीलता और कूटनीतिक शक्ति का सटीक पैमाना माना जाता है।

भारत की नई वैश्विक साख

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 80वां स्थान हासिल किया है। भारतीय नागरिक अब दुनिया के 55 देशों में बिना किसी पूर्व वीजा के यानी वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। यह सुधार भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और विभिन्न देशों के साथ मजबूत होते कूटनीतिक रिश्तों का सीधा परिणाम माना जा रहा है।

पड़ोसी देशों का कमजोर प्रदर्शन

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सीमा से लगे चार देशों का पासपोर्ट सबसे कमजोर बना हुआ है। अफगानिस्तान इस सूची में 101वें स्थान के साथ सबसे नीचे है, जबकि पाकिस्तान 98वें पायदान पर मौजूद है। वहीं नेपाल को 96वीं और बांग्लादेश को 95वीं रैंकिंग मिली है, जो इन देशों के नागरिकों की वैश्विक यात्रा स्वतंत्रता को काफी सीमित कर देती है।

सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की सूची

2026 की रैंकिंग में सिंगापुर एक बार फिर दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बनकर उभरा है, जिसके नागरिक 192 देशों में बिना वीजा जा सकते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया 188 देशों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर काबिज हैं। यूरोपीय देश जैसे डेनमार्क, लक्जमबर्ग, स्पेन और स्वीडन 186 देशों की पहुंच के साथ तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं।

कमजोर पासपोर्ट के बड़े नुकसान

कमजोर पासपोर्ट होने से न केवल यात्रा की योजना बनाना मुश्किल होता है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी महंगा साबित होता है। यात्रियों को महीनों पहले वीजा अपॉइंटमेंट और भारी कागजी कार्रवाई से गुजरना पड़ता है, जिससे अचानक की जाने वाली बिजनेस ट्रिप्स या छुट्टियां असंभव हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, दूतावासों की लंबी प्रक्रिया और वीजा शुल्क यात्रा के बजट को काफी बढ़ा देते हैं।

भविष्य की संभावनाएं और सुधार

विशेषज्ञों का मानना है कि ई-पासपोर्ट की शुरुआत और नए द्विपक्षीय समझौतों के बाद भारत की रैंकिंग में और सुधार आने की उम्मीद है। 2026 में भारत का 80वें स्थान पर आना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन शीर्ष 50 देशों में शामिल होने के लिए अभी लंबी राह तय करनी होगी। पासपोर्ट की बढ़ती ताकत से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि भारतीय छात्रों और व्यवसायियों के लिए वैश्विक अवसर भी खुलेंगे।

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