अमेरिकियों को पच नहीं रही भारत-EU ट्रेड डील...ट्रंप के वित्त मंत्री ने उगला जहर, बोले- यूरोप ने किया निराश

India EU Trade Deal US Reaction: भारत-EU फ्री ट्रेड डील पर अमेरिका भड़का। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूरोप पर व्यापार को यूक्रेन से ऊपर रखने और रूसी तेल के जरिए युद्ध फंड करने का आरोप लगाया।
Scott Bessent on India-EU FTA
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Scott Bessent on India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) को लेकर अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। मंगलवार 27 जनवरी को नई दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से ही अमेरिकी बयानबाजी तेज हो गई है। अब अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत के साथ व्यापार समझौता करने को लेकर यूरोपीय संघ की आलोचना की है। बेसेंट ने हाल ही में मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट पर बात की। उन्होंने कहा कि, यह डील दर्शाती है कि यूरोप ने यूक्रेन के लोगों के प्रति अपनी चिंता से पहले अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि यूरोप के रुख से वे बेहद निराश हैं। यूरोप के फैसले से अमेरिका निराश  बेसेंट ने आगे कहा कि, “यूरोप को वही करना चाहिए जो उसके लिए सबसे अच्छा हो, लेकिन मैं आपको बता दूं कि यूरोपीय लोग मुझे काफी निराशाजनक लगे।” उनकी यह टिप्पणी भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के ठीक एक दिन बाद आई है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है। यूरोपीय संघ का कहना है कि यह समझौता दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ है, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है।

भारत पर टैरिफ को लेकर भी नाराजगी

बेसेंट ने संकेत दिया कि इस डील से यह भी साफ हो गया है कि पिछले साल भारत पर अधिक टैरिफ लगाने के वॉशिंगटन के फैसले में यूरोपीय संघ ने अमेरिका का साथ क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा, “यूरोप हमारे साथ शामिल नहीं होना चाहता था। अब समझ आता है कि वे भारत के साथ यह डील करना चाहते थे।” उन्होंने आगे कहा कि जब भी कोई यूरोपीय नेता यूक्रेन के लोगों के महत्व की बात करे, तो यह याद रखना चाहिए कि यूरोप ने व्यापार को यूक्रेन से पहले रखा।

रूसी तेल को लेकर गंभीर आरोप

अमेरिकी वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि भारत के साथ व्यापारिक डील करके यूरोप अप्रत्यक्ष रूप से अपने ही खिलाफ युद्ध को फंड कर रहा है। उन्होंने कहा, “रूसी तेल भारत जाता है, वहां रिफाइन होता है और फिर वही रिफाइंड उत्पाद यूरोपीय देश खरीदते हैं। इस तरह वे अपने ही खिलाफ युद्ध को फाइनेंस कर रहे हैं।”

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