सिंधु जल संधि: भारत ने पाकिस्तान की आखिरी चाल को भी की नाकाम, PCA के फैसले को मानने से किया इनकार

India-Pak Relations: भारत ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के सिंधु जल संधि पर फैसले को खारिज करते हुए इसे अवैध बताया और पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन के चलते संधि को निलंबित करने की घोषणा की।
सिंधु जल संधि: भारत ने पाकिस्तान की आखिरी चाल को भी की नाकाम, PCA के फैसले को मानने से किया इनकार
सिंधु जल संधि पर PCA का फैसला (फोटो- सोशल मीडिया)
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India Rejected PCA Court Decision: भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की आखिरी चाल को नाकाम कर दिया है। भारत ने गुरुवार को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के हालिया फैसले को खारिज करते हुए कहा कि, इसका कोई कानूनी आधार या महत्व नहीं है और यह भारत के पानी उपयोग के अधिकारों पर असर नहीं डालता।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने कभी भी इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय की वैधता, अधिकार-क्षेत्र या क्षमता को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा, “इसके निर्णय अधिकार-क्षेत्र से बाहर हैं, कानूनी रूप से शून्य हैं और भारत के जल उपयोग अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं डालते। पाकिस्तान द्वारा तथाकथित फैसले का चयनित और भ्रामक हवाला भी भारत सख्ती से खारिज करता है।”

पहलगाम हमले के बाद से समझौता रद्द

जायसवाल ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा लगातार प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद, जिसमें हाल का ‘निर्मम पहलगाम हमला’ भी शामिल है, इसके जवाब में भारत सरकार ने संप्रभु निर्णय के तहत सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित कर दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने कभी भी इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के गठन को वैध नहीं माना और इसे संधि का गंभीर उल्लंघन बताया है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे किसी भी मंच की कार्यवाही और उसके फैसले अवैध और स्वतः शून्य हैं। संधि निलंबित रहने तक भारत अपने दायित्वों के पालन के लिए बाध्य नहीं है और कोई भी मध्यस्थता न्यायालय, विशेषकर यह अवैध रूप से गठित निकाय, भारत के संप्रभु अधिकारों की वैधता की जांच करने का अधिकार नहीं रखता।

भारत ने खारिज किया कोर्ट का फैसला

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय, जिसे पाकिस्तान के इशारे पर गठित किया गया, ने जम्मू-कश्मीर स्थित किशनगंगा और राटले जलविद्युत परियोजनाओं पर अपनी ‘अधिकारिता’ से जुड़ा एक पूरक निर्णय जारी किया है। भारत ने इस पूरक फैसले को भी पूर्व के सभी फैसलों की तरह सिरे से खारिज कर दिया है।

मंत्रालय ने इस कदम को पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर जिम्मेदारी से बचने का “एक और बेताब प्रयास” करार दिया और कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया उसकी दशकों पुरानी धोखाधड़ी और हेरफेर की नीति का हिस्सा है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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