

बलूचिस्तान: पाकिस्तान (Pakistan) एक मुस्लिम बाहुल्य देश (Muslim Country) है। लेकिन, इस देश में एक ऐसा मंदिर (Temple) हैं, जहां दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। माता रानी (Mata Rani Mandir In Pakistan) का यह मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध है। जिस मंदिर के बारे में हम बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि हिंगलाज मंदिर (Hinglaj Mata Mandir) है। इस मंदिर की सबसे ज़्यादा आश्चर्य करने वाली बात यह है कि यहां माता रानी के दर्शन करने केवल हिन्दू नहीं बल्कि मुस्लिम भी आते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में...
पाकिस्तान के बलूचिस्तान (Balochistan) में यह हिंगलाज माता का मंदिर स्थित है। यह मंदिर बेहद पुराना है और इसकी अपनी पौराणिक कथाएं हैं, जो काफी प्रसिद्ध। यह अपनी प्रचलित कथाओं की वजह से काफी मशहूर है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने जब माता सती का शीश काटने के लिए चक्र फेंका था तो उनके चक्र से कटा शीश जिस जगह पर गिरा था, यही वह जगह है। यह मंदिर बलूचिस्तान से 120 किलोमीटर दूर हिंगुल नदी के तट पर स्थित है।
हिंगलाज माता के मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां हिन्दुओं के साथ मुस्लिम भी माता रानी की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ करने आते हैं। वह माता रानी के सामने अपने शीश झुकाते हैं। इस मंदिर को मुस्लिम लोग 'नानी का मंदिर' के नाम से पुकारते हैं। बताया जाता है कि मुसलमान किसी प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए मंदिर में आस्था रखते हैं और देवी मां के दर्शन करने आते हैं। मुस्लिम समाज के लोग मंदिर को अपने तीर्थयात्रा का हिस्सा भी मानते हैं। इसलिए वह इसे 'नानी का हज' भी कहते हैं।
इस मंदिर काफी पुराना है, इसलिए इसके बारे में कई कहानियां भी है। कहा जाता है कि 1500 साल पहले घूमने आए चीनी बौद्ध भिक्षुओं ने इस मंदिर को लेकर कई बातें लिखी हैं। इस मंदिर के बारे में चीनी बौद्ध भिक्षुओं ने बताया कि मोहम्मद बिन कासिम और मोहम्मद गजनी ने इस मंदिर को कई बार लूटा था। वहीं इस मंदिर में रोजाना 'जय माता दी' के जयकारे भी लगते हैं। माता रानी के जयकारा लगाने वालों में केवल हिन्दू नहीं मुसलमान भी शामिल होते हैं। इसे हिंगलाज भवानी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है, जो हिंगलाज क्षेत्र में है।
पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसा कहा जाता है धरती पर मां के पहले स्थान के रूप में हिंगलाज माता के मंदिर को ही जाना जाता है। यह 51 शक्तिपीठ में से सबसे महत्वपूर्ण पीठ है। ज्ञात हो कि, भगवान विष्णु के चक्र से माता सती के अंग कटने के बाद जिन-जिन जगहों पर गिरे हैं, उस जगह को शक्तिपीठ कहा जाता है।