

Gulf Countries Angry With US: अमेरिका और ईरान के बीच करीब छह महीने से जंग जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के विरुद्ध युद्ध शुरू करने के बाद से ही आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। इसी बीच इस युद्ध से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर ट्रंप की मुश्किलें और बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि खाड़ी देश युद्ध को लेकर अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप से नाराज हैं।
खाड़ी देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी साझेदारी और हथियारों की आपूर्ति के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं। अमेरिका इस समय ईरान युद्ध में उलझे होने के कारण इन देशों को ठीक से हथियारों की सप्लाई करने और ईरानी हमलों से उनकी रक्षा कर पाने में असमर्थ नहीं है। ऐसे में खाड़ी देश अमेरिका से नाराज हैं। खाड़ी देशों के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि युद्ध ट्रंप ने शुरू किया लेकिन इसकी कीमत हमें चुकानी पड़ रही है।
यूरोप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पिछले हफ्ते सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता अमेरिका के लिए एक संकेत था। यह समझौता दर्शाता है कि शक्तिशाली खाड़ी देश अब अपनी रक्षा के लिए अमेरिका के अलावा दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। मिसाल के तौर पर सऊदी अरब ने अपनी रक्षा के लिए तुर्की और पाकिस्तान जैसे ताकतवर मुस्लिम देशों से समझौता किया है। उनकी नजर में अब अमेरिका उनकी रक्षा के लिए काफी नहीं है।
वहीं, ट्रंप प्रशासन की राय इससे उलट है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर अमेरिकी मीडिया से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के सभी खाड़ी देशों के नेताओं से अच्छे संबंध हैं। अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू करने से पहले खाड़ी में अमेरिकी सहयोगियों को इसकी जानकारी दी थी और व्हाइट हाउस ऑपरेशन होने से पहले से ही उनसे संपर्क में था।
हालांकि, यूरेशिया ग्रुप में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका मामलों के निदेशक फिरास मक्सद की राय इस युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारी से अलग है। उनके मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद इसे लेकर खाड़ी देशों में निराशा देखने को मिली है। उनका मानना है कि फारस की खाड़ी में अमेरिकी सहयोगियों को लगता है कि उन्हें एक ऐसे युद्ध में बेवजह उलझाया गया जिसे सुलझाने के लिए ट्रंप अब संघर्ष कर रहे हैं।
अमेरिकी विशेषज्ञ और अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट की फेलो एना जैकब्स का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही खाड़ी देशों का अमेरिका पर भरोसा कम होता जा रहा है। खाड़ी देशों का मानना है कि इस इलाके में अमेरिकी हमले के कारण उनकी सुरक्षा बढ़ने की बजाय कम हो रही है। यहां अमेरिका के प्रति लोगों की सोच में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। ईरान के खिलाफ जंग शुरू होने से पहले भी यहां अमेरिकी सेना का बहुत जोश के साथ स्वागत नहीं किया जाता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब खाड़ी में अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगियों में से एक है। हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में सऊदी पर अपनी सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ा है। इराक में ईरान और ईरान समर्थित गुट लगातार सऊदी पर हमला कर रहे हैं। इसके अलावा यमन के हूथी विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब को निशाना बनाया था।
हूथी सेना इससे पहले भी सऊदी अरब के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर चुके हैं और इस बार उन्होंने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इससे सऊदी को तेल व्यापार में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सऊदी अरब ने अब अमेरिका के अलावा अपनी सुरक्षा को लेकर दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।