Galwan Clash: शी जिनपिंग का बड़ा एक्शन, गलवान झड़प का आदेश देने वाले चीनी सैन्य अधिकारी को पद से हटाया

Galwan Clash General: गलवान में भारतीय सेना के खिलाफ झड़प का आदेश देने वाले चीनी सेना के जनरल झाओ जांगकी को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी प्रमुख पदों से हटाकर एक बहुत बड़ा कड़ा संदेश दिया है।
Galwan Clash PLA General Sacked
जनरल झाओ जांगकी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Galwan Clash PLA General Sacked: गलवान घाटी में 2020 में हुई भारत-चीन सैन्य झड़प के बाद चीनी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी पर बड़ी कार्रवाई हुई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में जनरल झाओ जांगकी को कई अहम पदों से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई को चीन की सैन्य व्यवस्था में चल रही सख्ती और भारत के साथ रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

झाओ जांगकी चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख रह चुके हैं। यह कमांड भारत से लगी सीमा के साथ-साथ तिब्बत और शिनजियांग के संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालती है। उनके कार्यकाल के दौरान 2017 में डोकलाम विवाद और 2020 में गलवान संघर्ष जैसे बड़े सीमा तनाव सामने आए थे।

डोकलाम और गलवान के दौरान संभाली थी कमान

जनरल झाओ जांगकी फरवरी 2016 में वेस्टर्न थिएटर कमांड के पहले कमांडर नियुक्त किए गए थे। इस कमांड की स्थापना भारत-चीन सीमा से जुड़े रणनीतिक क्षेत्रों में सैन्य संचालन को मजबूत करने के लिए की गई थी।

उनके कार्यकाल में 2017 का डोकलाम गतिरोध करीब 72 दिनों तक चला था। इसके कुछ वर्षों बाद जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें दोनों देशों के सैनिकों की जान गई थी।

26 अगस्त को चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था CPPCC ने झाओ जांगकी को 14वीं राष्ट्रीय समिति की स्थायी समिति से हटाने के लिए मतदान किया। इसके अलावा उन्हें जातीय और धार्मिक मामलों से जुड़ी समिति के उप निदेशक सहित अन्य जिम्मेदारियों से भी मुक्त कर दिया गया है।

दो अन्य वरिष्ठ जनरलों पर भी कार्रवाई

झाओ जांगकी के अलावा चीन ने केंद्रीय सैन्य आयोग से दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों झांग यॉक्सिया और लियू झेनली को भी हटाया है। चीनी अधिकारियों की ओर से इन कार्रवाइयों के पीछे अनुशासन और कानून के उल्लंघन से जुड़ी जांच का हवाला दिया गया है।

हालांकि, बीजिंग ने झाओ को हटाए जाने की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में उनकी कार्रवाई को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ विश्लेषक इसे राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेना में अनुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से चल रही मुहिम से जोड़कर देख रहे हैं।

शी जिनपिंग ने सत्ता में आने के बाद सेना और सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी है। पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर भी जांच और कार्रवाई हुई है।

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डोभाल-वांग यी वार्ता के बीच बड़ा फैसला

चीन में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत का दौर जारी है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 24 और 25 अगस्त को बीजिंग में 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई।

बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के व्यापक रणनीतिक मार्गदर्शन में आगे बढ़ने की बात भी कही गई है।

गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा है। ऐसे में चीन की सेना में वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई और साथ-साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, जनरल झाओ को हटाने को सीधे तौर पर भारत के साथ संबंध सुधारने के फैसले के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि चीन ने कार्रवाई का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है।

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