China Medog Dam: चीन का सबसे बड़ा मेडोग हाइड्रोपावर बांध बना दुनिया के लिए बड़ा 'टाइम बम'

China Medog Dam: चीन का सबसे बड़ा 60 हजार मेगावाट का मेडोग बांध एक सक्रिय पाइझेन फॉल्ट लाइन पर बन रहा है। चीनी भूवैज्ञानिकों ने इसे भारत और दुनिया के लिए खतरनाक भूगर्भीय टाइम बम बताया है।
China Medog Dam: World Largest Hydropower Project In Tibet On Active Fault Line Is A Time Bomb
चीन मेडोग बांध (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Dangerous China Medog Dam: चीन के तिब्बत इलाके में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा मेडोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट एक बड़े और खतरनाक विवाद में घिर गया है। चीन के सरकारी भूवैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने इस विशाल बांध की सुरक्षा पर बहुत गंभीर सवाल उठाए हैं। रिसर्च के मुताबिक यह भारी प्रोजेक्ट एक सक्रिय पाइझेन फॉल्ट लाइन के ठीक ऊपर बनाया जा रहा है। यह फॉल्ट लाइन भविष्य में बड़े भूकंप और बहुत भारी तबाही का मुख्य कारण बन सकती है।

यह बड़ा बांध भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा से केवल 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 60 हजार मेगावाट तक बताई जा रही है। चीनी वैज्ञानिकों ने अपनी ही सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए इसे एक खतरनाक भूगर्भीय टाइम बम करार दिया है। इस खुलासे के बाद भारत समेत कई पड़ोसी देशों में इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

137 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट

यह विशाल मेडोग हाइड्रोपावर स्टेशन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो यानी ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जा रहा है। इस पूरी भारी परियोजना की अनुमानित लागत 1 ट्रिलियन युआन यानी लगभग 137 अरब डॉलर आंकी गई है। चीन ने इसे दिसंबर 2024 में मंजूरी दी और इसका निर्माण जुलाई 2025 में पूरी तरह से शुरू हो गया था। सरकार ने इस विशाल बांध को साल 2033 तक पूरी तरह चालू करने का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है।

सक्रिय फॉल्ट लाइन का खतरा

चीनी वैज्ञानिकों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह पाइझेन फॉल्ट प्लीस्टोसीन युग से ही काफी ज्यादा सक्रिय है। पुराने झील के तलछट स्पष्ट बताते हैं कि यह भूगर्भीय फॉल्ट 9,500 साल पहले तक पूरी तरह सक्रिय था। साल 2017 में तिब्बत में इसी फॉल्ट के उत्तरी हिस्से में 6.9 तीव्रता का बहुत ही भारी भूकंप आया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस फॉल्ट के हिलने से पूरे बांध की सुरक्षा गहरे खतरे में पड़ सकती है।

जमीन की क्षमता हुई कमजोर

बार-बार भूकंप आने और फॉल्ट के लगातार हिलने से इस पूरे इलाके की जमीन काफी कमजोर हो चुकी है। भूवैज्ञानिकों ने साफ बताया है कि आसपास की चट्टानें पहले ही टूट चुकी हैं और उनकी मजबूती कम हो गई है। इतने बड़े 60 हजार मेगावाट के बांध और जलाशय का भारी वजन सहने की क्षमता अब यहां बिल्कुल नहीं है। इसलिए भूकंप की विकट स्थिति में इस पूरे प्रोजेक्ट के ढहने का बहुत बड़ा और गंभीर खतरा बना हुआ है।

भूस्खलन और तबाही की आशंका

वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इस बड़े बांध के जलाशय के आसपास की जमीन बहुत ही ढीली है। जब यह विशाल जलाशय पानी से भरेगा तो फॉल्ट की सक्रियता और भूकंप से भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ेगा। इसके भारी दबाव से बड़ी चट्टानें खिसक सकती हैं और बांध के अचानक टूटने का जोखिम सबसे ज्यादा होगा। इसलिए इसके निर्माण के दौरान ढलानों को बहुत मजबूत करने के लिए काफी कड़े सुरक्षा उपाय करने होंगे।

भारत और बांग्लादेश की नजर

भारत और बांग्लादेश इस पूरे संवेदनशील मामले और नदी के बहाव पर बहुत ही बारीकी से नजर रखे हुए हैं। जल विशेषज्ञों के अनुसार चीन इस नदी का सारा पानी पूरी तरह से बंद बिल्कुल भी नहीं कर सकता है। असली सवाल यह है कि हिमालय के इस अति संवेदनशील भूकंप प्रभावित इलाके में अगर बांध टूटता है तो क्या होगा। अगर यह खतरनाक टाइम बम फटा तो नीचे की ओर बसे देशों में बहुत भयंकर बाढ़ आ सकती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com