

बीजिंग: चीन का अंतरिक्षयान चांग ई-5 बीते मंगलवार को चंद्रमा पर उतर गया, इस यान को 24 नवंबर को चीन के सबसे शक्तिशाली रॉकेट लांग मार्च-5 के जरिए लांच किया गया था। चीनी एजेंसी 'चीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन' के मुताबिक, 4 दशक बाद पहली बार कोई देश चंद्रमा की सतह से मिट्टी को पृथ्वी पर लेकर आने वाला है। चाइनीज एकेडमी आफ साइंसेज (CAS) के अधिकारियों के मुताबिक बताया जा रहा है कि प्राप्त की गई मिट्टी में पानी के मात्रा मिली है।
'चीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन' के अधिकारियों के अनुसार, अंतरिक्षयान चांग ई-5 मिशन को चांद पर भेजा गया था, चीनी वैज्ञानिकों के द्वारा चंद्रमा से लाए गए मिट्टी के नमूनों का अध्ययन करने के दौरान वैज्ञानिकों को चांद पर से लाए गए मिट्टी में पानी के अणु मिले हैं। अलीबाबा समूह के एक हांगकांग में स्थित 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की खबर के अनुसार, यह बताया जा रहा है कि अनुसंधान बीजिंग नेशनल लेबोरेटरी फॉर कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स और इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स ऑफ द चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज तथा अन्य घरेलू अनुसंधान संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं के द्वारा संयुक्त रूप से रिसर्च किया गया जिसके बाद रिसर्चर ने चांद पर से लाए गए मिट्टी में पानी के मात्रा को पाया गया है।
अनुसंधान रिपोर्ट यानी ( रिसर्च का परिणाम ) 16 जुलाई को पत्रिका के 'नेचर एस्ट्रोनॉमी' श्रेणी में प्रकाशित हुई। CAS ने मंगलवार को बताया कि नवंबर 2020 में 'चांग ई-5' मिशन द्वारा लाए गए चंद्रमा की मिट्टी के नमूनों के आधार पर चीनी वैज्ञानिकों ने आणविक जल से युक्त एक जलयोजित खनिज पाया है। वर्ष 2009 में भारत ने भी एक चंद्रयान मिशन लांच किया था, चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान ने चांद के उस क्षेत्र में लैंड किया था जहां सूर्य का प्रकाश आसानी से जा सकता था, उस समय में भारत के वैज्ञानिकों को चांद के उस क्षेत्र में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं के रूप में जलयोजित खनिजों के संकेतों का पता चला था। इस प्रक्रिया में उपकरण का उपयोग किया गया था, उपकरणों में नासा का मून मिनरलॉजी मैपर (M3) भी शामिल था जो एक इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर है, जिसने चंद्रमा पर खनिजों में पानी की खोज की पुष्टि करने में मदद की।