शहबाज नहीं जिनपिंग ने करवाया सीजफायर! China के इशारे पर पाक बना Mediator, ट्रंप ने भी किया ड्रैगन का शुक्रिया

US-Iran War: अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। क्या यह समझौता वास्तव में शांति की पहल है या चीन के इशारे पर बुना गया कोई कूटनीतिक जाल?
China Mediation Iran War
ईरान युद्ध में चीन मध्यस्थता (सोर्स- सोशल मीडिया)
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China Mediation Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की कथित ‘मध्यस्थ’ भूमिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां पाकिस्तान इस पहल का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है, वहीं कई विशेषज्ञ इसके पीछे की वास्तविक ताकतों पर सवाल उठा रहे हैं।

फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व विश्लेषक जोनाथन शेंज़र ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर संदेह जताया है। उनका कहना है कि यह समझना जरूरी है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में शांति स्थापित करना चाहता है या फिर वह चीन (China) के प्रभाव में काम कर रहा है।

China के इशारे पर काम कर रहा पाक

शेंज़र के मुताबिक, पाकिस्तान इस समय चीन (China) के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) और तथाकथित ‘डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी’ में गहराई से फंसा हुआ है। ऐसे में उसके लिए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए संबंध बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है या फिर वह केवल चीन की नीतियों को आगे बढ़ाने का माध्यम बन गया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि इस युद्धविराम के पीछे चीन की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार, चीन ने ही आखिरी समय में ईरान को प्रस्ताव मानने के लिए तैयार किया। हालांकि, शेंज़र इसे अलग नजरिए से देखते हैं और मानते हैं कि असली बातचीत अमेरिका, ईरान और चीन के बीच हुई, जबकि पाकिस्तान सिर्फ एक ‘माउथपीस’ की तरह सामने आया।

जेडी वेंस को समझौते से रखा गया दूर

इस घटनाक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भूमिका को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी देर से दी गई, जबकि वे पहले से विदेशी हस्तक्षेप और सैन्य कार्रवाई को लेकर सतर्क रुख रखते रहे हैं।

हालांकि, दो हफ्तों के लिए बमबारी रुकने से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि संकट अभी टला नहीं है। शेंज़र ने चेतावनी दी कि ईरान के भीतर सत्ता परिवर्तन की कोशिशें जारी रह सकती हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी रह सकती है।

प्रॉक्सी नेटवर्क है असली समस्या

सबसे बड़ी चुनौती ईरान के ‘प्रॉक्सी नेटवर्क’ जैसे हमास, हिजबुल्लाह और हूती को लेकर है। 2023 में शुरू हुए संघर्ष में इन समूहों की अहम भूमिका रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन संगठनों से जुड़ी चुनौतियों का समाधान नहीं होता, तब तक स्थायी शांति की संभावना सीमित रहेगी।

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