बांग्लादेश में Gen Z का हल्लाबोल, शिक्षा मंत्री की टिप्पणी पर भड़के छात्र; ढाका से चटगांव तक भारी बवाल

Bangladesh Student Protest: बांग्लादेश में बाढ़ और परीक्षाओं के बीच शिक्षा मंत्री की विवादित टिप्पणी ने आग में घी का काम किया है। छात्रों के भारी विरोध के बाद प्रधानमंत्री को आपात बैठक बुलानी पड़ी।
Gen Z up in arms in Bangladesh; students outraged by Education Minister's remarks; massive unrest from Dhaka to Chattogram.
बांग्लादेश में भड़के छात्र, फोटो (सो. IANS)
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Gen Z Protest In Bangladesh: बांग्लादेश में एक बार फिर सड़कों पर छात्र शक्ति का सैलाब देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार के सत्ता में आने के महज पांच महीने बाद ही देश की Gen Z पीढ़ी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आई है।

राजधानी ढाका समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस विरोध प्रदर्शन की जड़ में न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि शिक्षा मंत्री की एक अपमानजनक टिप्पणी भी शामिल है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

विवाद की शुरुआत जुलाई की शुरुआत में हुई 'हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट' (HSC) और समकक्ष परीक्षाओं के दौरान हुई। इन परीक्षाओं में देशभर से करीब 13 लाख छात्र शामिल हो रहे थे। 2 जुलाई से परीक्षाएं सुचारू रूप से शुरू हुई थीं, लेकिन दूसरे हफ्ते में मूसलाधार बारिश ने स्थिति बिगाड़ दी। भारी बारिश के चलते चटगांव क्षेत्र में भीषण बाढ़ आ गई और ढाका व चटगांव जैसे महानगर जलमग्न हो गए।

शिक्षा मंत्रालय ने इस स्थिति में चटगांव शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में तो परीक्षाएं स्थगित कर दीं, लेकिन बाकी बोर्डों में परीक्षाएं जारी रखने का फैसला किया। इस दोहरी नीति ने छात्रों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया, क्योंकि कोमिला जैसे अन्य जिलों में भी छात्र घुटने तक भरे पानी और तूफान के बीच परीक्षा केंद्र पहुंचने को मजबूर थे।

बांग्लादेश में क्यों फूटा छात्रों का गुस्सा?

छात्रों का यह गुस्सा तब फूट पड़ा जब शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस ऑडियो में मंत्री एक छात्रा के अभिभावक से बात कर रहे थे और उन्होंने कथित तौर पर छात्राओं के लिए 'फार्म की मुर्गियां' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

इस अपमानजनक टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ढाका, चटगांव और कोमिल्ला सहित कम से कम 13 जिलों में छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किए, सड़कें जाम कीं और शिक्षा बोर्डों के कार्यालयों का घेराव किया।

सरकार ने बुलाई आपात बैठक

बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 14 जुलाई को संसद भवन में शिक्षा मंत्री के साथ एक आपात बैठक की। इसके तुरंत बाद कड़े रुख को नरम करते हुए शिक्षा मंत्री मिलन ने संसद में अपने बयान के लिए माफी मांगी।

उन्होंने स्वीकार किया कि भारी बारिश और जलभराव के कारण छात्रों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 15 जुलाई को सरकार ने घोषणा की कि जो छात्र खराब मौसम के कारण परीक्षा नहीं दे पाए, उनके लिए विशेष रूप से दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।

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