बांग्लादेश में अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद युनुस भ्रष्टाचार के मामले में बरी, मुखिया बनते ही दिखी पॉवर

एक कहावत आपने सुनी होगी 'जब सईयां भए कोतवाल तब डर काहे का' लेकिन बांग्लादेश में इससे एक कदम आगे का मामला सामने आया है। यहां अंतरिम सरकार के प्रमुख बनते ही मोहम्मद युनुस भ्रष्टाचार के मामले में बरी हो गए हैं।
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मोहम्मद यूनुस, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
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ढाका : एक कहावत आपने सुनी होगी 'जब सईयां भए कोतवाल तब डर काहे का' लेकिन बांग्लादेश में इससे एक कदम आगे का मामला सामने आया है। यहां अंतरिम सरकार के प्रमुख बनते ही मोहम्मद युनुस भ्रष्टाचार के मामले में बरी हो गए हैं। ढाका के विशेष न्यायाधीश न्यायालय-4 भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की अभियोजन वापस लेने की याचिका को स्वीकार कर लिया है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को भ्रष्टाचार निरोधक आयोग द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में रविवार को बरी कर दिया गया है। यूनुस ने बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद तीन दिन पहले ही पदभार ग्रहण किया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

डेली स्टार समाचार पत्र ने भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि ढाका के विशेष न्यायाधीश न्यायालय-4 के न्यायाधीश मोहम्मद रबीउल आलम ने भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 494 के तहत मामले में अभियोजन वापस लेने की मांग की गई थी।

मुखिया बनते ही दिखी पॉवर

सात अगस्त को ढाका की एक अदालत ने श्रम कानून उल्लंघन के एक मामले में यूनुस और ग्रामीण टेलीकॉम के तीन शीर्ष अधिकारियों अशरफुल हसन, एम शाहजहां और नूरजहां बेगम को बरी कर दिया था। यूनुस (84) ने बृहस्पतिवार को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली थी। जिसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने याचिका दाखिल करते हुए अभियोजन वापस लेने की मांग की थी।

हसीना के शासनकाल में दर्ज हुए थे मामले

नूरजहां बेगम 16 सदस्यीय सलाहकार परिषद की सदस्य हैं जो राज्य के मामलों को चलाने में मोहम्मद यूनुस की सहायता करेंगी। शेख हसीना के शासनकाल के दौरान यूनुस पर दर्जनों मामले दर्ज किये गये थे। जनवरी में एक अदालत ने श्रम कानून उल्लंघन के आरोप में यूनुस को छह महीने जेल की सजा सुनाई थी।

- एजेंसी इनपुट के साथ

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