देश छोड़ने के बाद शेख हसीना का पहला बयान- बांग्लादेश में मेरे पिता समेत शहीदों का हुआ अपमान

शेख हसीना ने देश छोड़ने के बाद शेख हसीना ने पहला बयान जारी किया है और अपने पिता समेत शहीदों के अपमान के लिए कार्रवाई की मांग की। बांग्लादेश में हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और संसद में प्रदर्शनकारियों के घुसपैठ के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और वह भारत आ गई थीं।
बांग्लादेश में न होकर भी सोशल मीडिया पर छाईं शेख हसीना, ICT ने कसा शिकंजा
शेख हसीना Pic: Social Media
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नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बीते मंगलवार को देश छोड़ने के बाद पहली बार अपना बयान जारी किया है। उन्होंने बयान में कहा, 'जिन बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में देश ने आजादी हासिल की थी, उनका अब खुब अपमान किया गया है।'उन्होंने बयान में कहा कि, "उन्होंने (प्रदर्शनकारियों) मेरे पिता का अपमान किया है, मैं देश वासियों से न्याय की मांग करती हूं।'

जानकारी दें कि शेख हसीना बीते 5 अगस्त को देश छोड़ कर भारत आई थीं, तब से वे यहां हैं। शेख हसीना का यह बयान बेटे सजीब वाजेद के हवाले से सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे पोस्ट किया। इसके साथ ही शेख हसीना ने बांग्लादेशी नागरिकों से आगामी 15 अगस्त अपने पिता शेख मुजीबुर्रहमान की बर्सी पर शोक मानने का आग्रह किया।

बता दें कि 15 अगस्त 1975 को बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दूसरी तरफ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आगामी 15 अगस्त की छुट्टी को कैंसिल कर दी है।

अपने बयान में हसीना ने कहा, "मैं छात्रों, शिक्षकों, पुलिस कर्मियों, गर्भवती महिलाओं, पत्रकारों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, कामकाजी लोगों, अवामी लीग और उसके सहयोगी संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं, आम लोगों और कई प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों की मौत पर दुख व्यक्त करती हूं।" हसीना ने कहा कि, "मैं अपने जैसे उन लोगों के प्रति सहानुभूति रखती हूं, जो अपने प्रियजनों को खोने के दर्द के साथ जी रहे हैं। मैं इन हत्याओं और आतंकवादी कृत्यों में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए उचित जांच और उन्हें उचित सजा देने की मांग करती हूं।"

वहीं अंतरिम सरकार ने देश के संस्थापक और हसीना के पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के कारण 15 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय अवकाश मंगलवार को रद्द कर दिया।

इसके साथ ही अपने बयान में हसीना ने हिंसा के दौरान बंगबंधु संग्रहालय को जला दिए जाने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि "हमारे पास जो स्मृति और प्रेरणा थी, वह जलकर राख हो गई। यह किसी ऐसे व्यक्ति का घोर अपमान है...जिसके नेतृत्व में हम एक स्वतंत्र राष्ट्र बने। मैं इस कृत्य के लिए देशवासियों से न्याय की मांग करती हूं।"

इसके साथ ही शेख हसीना ने बांग्लादेशियों से इस दिन को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने, बंगबंधु स्मारक संग्रहालय परिसर में पुष्पांजलि अर्पित करने और प्रार्थना करने का आग्रह किया। हसीना के इस्तीफा देने और देश छोड़ने के तुरंत बाद गुस्साई भीड़ ने संग्रहालय को आग लगा दी थी।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री हसीना के देश छोड़ने के 8 वें दिन यानी बीते मंगलवार को उन पर हत्या का केस भी दर्ज हुआ है। हसीना सरकार में गृहमंत्री रहे असदुज्जमान खान, अवामी लीग के महासचिव ओबेदुल कादर और पूर्व आईजी अबदुल्ला अल मामुन सहित दो अन्य को भी इस केस में आरोपी बनाया गया है।

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