आजाद हुआ बलूचिस्तान! मुनीर की सेना के फेल हुए सभी सैन्य ऑपरेशन, 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐलान

Balochistan Independence Day: बलूचिस्तान में स्वतंत्रता सेनानियों के हमलों से पाक सेना बेदम है। मुनीर के सभी सैन्य ऑपरेशन फेल होने के बाद अब 11 अगस्त को बलूच संगठनों ने आजादी मनाने के ऐलान किया है।
All of Munir's Military Operations Failed; Independence Day to be Celebrated on August 11
बलूचिस्तान में पाक सेना के फेल हुए सभी सैन्य ऑपरेशन AI मॉडिफाइड फोटो
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Balochistan News In Hindi: पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान इस समय अपनी सबसे भीषण हिंसा के दौर से गुजर रहा है। बलूच स्वतंत्रता सेनानियों के सुनियोजित हमलों ने पाकिस्तानी सेना के लिए इस इलाके को नरक बना दिया है। खुफिया एजेंसियों और भारी सैन्य तैनाती के बावजूद, बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है और हर दिन जवानों के शव ताबूतों में बंद होकर मुख्यालय पहुंच रहे हैं।

नाकाम हो रहे सैन्य ऑपरेशन

पाकिस्तानी सेना ने बलूच विद्रोहियों को कुचलने के लिए 6 जुलाई को ‘ऑपरेशन शबान’ की शुरुआत की थी। इसके साथ ही इलाके में ‘ऑपरेशन अल-अज़्म’ भी चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों ही मिशन विद्रोहियों की मारक क्षमता को कम करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।

बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रभावी गुरिल्ला युद्ध लड़ रहे हैं। वे उस समय भी सटीक हमले करने में कामयाब हो रहे हैं, जब समूचे प्रांत में सेना, वायुसेना, नौसेना और ISI जैसी खुफिया एजेंसियों की भारी मौजूदगी है।

रणनीतिक ठिकानों पर खतरा

बलूचिस्तान की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी क्वेटा स्थित सेना की XII कोर पर है, जिसका नेतृत्व एक थ्री-स्टार जनरल करते हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान वायु सेना के चार ठिकाने यहां सक्रिय हैं, जिनमें क्वेटा का समुंगली बेस सबसे महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक रूप से अहम ग्वादर बंदरगाह, जो पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा पोर्ट है, वहां भी सेना और कोस्ट गार्ड की भारी तैनाती है। समुद्री व्यापारिक रास्तों पर नजर रखने के लिए ISI ने ग्वादर और सैंदक में विशेष ‘सिग्नल इंटेलिजेंस स्टेशन’ भी बना रखे हैं, लेकिन ये तमाम इंतजाम बलूच लड़ाकों को रोकने में बेअसर दिख रहे हैं।

11 अगस्त को आजादी का ऐलान

इस तनाव के  बीच बलूच संगठनों ने 11 अगस्त को अपना ‘स्वतंत्रता दिवस‘ मनाने का ऐलान कर दिया है, जिससे पाकिस्तानी हुकूमत की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अपनी साख बचाने के लिए सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने एक और नए सैन्य ऑपरेशन की घोषणा की है।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि बलूचिस्तान का दुर्गम पहाड़ी और विशाल इलाका सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जहाँ गुरिल्ला लड़ाकों को ढूंढना लगभग असंभव है।

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पाकिस्तान के हाथ से निकल रहा बलूचिस्तान

आपको बता दें कि बड़ी संख्या में सेना की मौजूदगी के बावजूद, बलूचिस्तान धीरे-धीरे पाकिस्तानी प्रशासन के हाथ से निकलता जा रहा है। जहां एक तरफ सेना विद्रोह को कुचलने के लिए नए प्लान बना रही है, वहीं बलूच लड़ाकों के हौसले बुलंद हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रक्षा विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या मुनीर राज में पाकिस्तान इस प्रांत को एकजुट रख पाएगा या इतिहास खुद को दोहराएगा।

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