Antarctica Ice Melt से समुद्र का जलस्तर बढ़ने का भारी खतरा, तबाही से बचने का समय है बहुत कम

Global Warming Antarctica Ice Melt: आज दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने अपनी नई रिसर्च में इस बड़े खतरे को लेकर दुनिया की सभी सरकारों को एक बेहद गंभीर चेतावनी दी है। नेचर जर्नल में छपी स्टडी के अनुसार दुनिया के पास रणनीतियां और प्लानिंग तैयार करने के लिए 30 से 50 साल बचे हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में दुनिया के कई बड़े देशों को भारी तबाही झेलनी पड़ेगी।
Antarctica Ice Melt: Global Warming Poses Severe Threat To World Sea Levels Rising Fast By 2100 Now
अंटार्कटिका (सोर्स- AI जनरेटेड)
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साइंटिस्ट्स का कहना है कि 2050-2070 तक कंप्यूटर मॉडल के जरिए समुद्र स्तर का अंदाजा लगाना आसान है। इसके बाद बर्फ पिघलने की रफ्तार अनियंत्रित हो जाएगी और सही अनुमान लगाना नामुमकिन होगा।
साइंटिस्ट्स का कहना है कि 2050-2070 तक कंप्यूटर मॉडल के जरिए समुद्र स्तर का अंदाजा लगाना आसान है। इसके बाद बर्फ पिघलने की रफ्तार अनियंत्रित हो जाएगी और सही अनुमान लगाना नामुमकिन होगा।
डॉ. फेलिसिटी मैककॉर्मैक की रिसर्च में अलग-अलग आइस शीट मॉडल्स का बहुत ही बारीकी से मूल्यांकन किया गया है। अगर कार्बन उत्सर्जन लगातार बढ़ा, तो वर्ष 2100 तक वैश्विक समुद्र स्तर 2 मीटर से भी ज्यादा बढ़ जाएगा।
डॉ. फेलिसिटी मैककॉर्मैक की रिसर्च में अलग-अलग आइस शीट मॉडल्स का बहुत ही बारीकी से मूल्यांकन किया गया है। अगर कार्बन उत्सर्जन लगातार बढ़ा, तो वर्ष 2100 तक वैश्विक समुद्र स्तर 2 मीटर से भी ज्यादा बढ़ जाएगा।
जमीन के नीचे की बर्फ खिसकने पर इस खतरनाक प्रोसेस को दोबारा पलटना या रोकना इंसान के बस में नहीं रहता। IPCC के मुताबिक, मुख्य बर्फ ढहने पर अगले 30 सालों में समुद्र स्तर बढ़ने की दर दोगुनी हो सकती है।
जमीन के नीचे की बर्फ खिसकने पर इस खतरनाक प्रोसेस को दोबारा पलटना या रोकना इंसान के बस में नहीं रहता। IPCC के मुताबिक, मुख्य बर्फ ढहने पर अगले 30 सालों में समुद्र स्तर बढ़ने की दर दोगुनी हो सकती है।
समुद्र का जलस्तर बढ़ने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और मानव आबादी पर बहुत ही विनाशकारी असर पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया में 25% प्रॉपर्टीज सीधा बाढ़ और भयानक तटीय तबाही की चपेट में पूरी तरह से आ जाएंगी।
समुद्र का जलस्तर बढ़ने से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और मानव आबादी पर बहुत ही विनाशकारी असर पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया में 25% प्रॉपर्टीज सीधा बाढ़ और भयानक तटीय तबाही की चपेट में पूरी तरह से आ जाएंगी।
प्रशांत महासागर के कई छोटे द्वीप और उनके आसपास की उपजाऊ जमीनें पानी बढ़ने से हमेशा के लिए जलमग्न हो जाएंगी। दुनिया भर में तटीय इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ेगा।
प्रशांत महासागर के कई छोटे द्वीप और उनके आसपास की उपजाऊ जमीनें पानी बढ़ने से हमेशा के लिए जलमग्न हो जाएंगी। दुनिया भर में तटीय इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर होना पड़ेगा।
स्टीवन चाउन का कहना है कि यह 30 से 50 साल का समय किसी बड़ी राहत का कोई भी संकेत नहीं है। बल्कि यह सरकारों के लिए एक्शन विंडो है ताकि वे मजबूत सुरक्षा दीवारें और रिलोकेशन प्लान तुरंत बना सकें।
स्टीवन चाउन का कहना है कि यह 30 से 50 साल का समय किसी बड़ी राहत का कोई भी संकेत नहीं है। बल्कि यह सरकारों के लिए एक्शन विंडो है ताकि वे मजबूत सुरक्षा दीवारें और रिलोकेशन प्लान तुरंत बना सकें।
ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े विकसित देशों की यह नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी है कि वे इन नतीजों को साझा करें। इन छोटे देशों पर डूबने और आबादी के तुरंत विस्थापन का सबसे पहला और सीधा खतरा मंडरा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े विकसित देशों की यह नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी है कि वे इन नतीजों को साझा करें। इन छोटे देशों पर डूबने और आबादी के तुरंत विस्थापन का सबसे पहला और सीधा खतरा मंडरा रहा है।
वैज्ञानिकों ने सभी नीति-निर्माताओं को अपनी योजना को दो स्पष्ट टाइमफ्रेम में बांटने का बहुत अहम सुझाव दिया है। शॉर्ट-टर्म प्लानिंग के तहत 30-50 साल के लिए तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षात्मक नीतियां बनानी होंगी।
वैज्ञानिकों ने सभी नीति-निर्माताओं को अपनी योजना को दो स्पष्ट टाइमफ्रेम में बांटने का बहुत अहम सुझाव दिया है। शॉर्ट-टर्म प्लानिंग के तहत 30-50 साल के लिए तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षात्मक नीतियां बनानी होंगी।

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