Gold Mine Collapse: कांगो में धंसी सोने की खदान, 10 मजदूरों की मौत...कई मलबे में दबे

कांगों के दक्षिण किवु प्रांत के कबारे में स्थित एक सोने की खदान ढह गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है। यह इलाका विद्रोहियों के नियंत्रण में है। विद्रही गुटों द्वारा नियुक्त उप गवर्नर ने हादसे की जानकारी दी।
Gold Mine Collapse: कांगो में धसी सोने की खदान, 10 मजदूरों की मौत...कई मलबे में दबे
प्रतीकात्मक तस्वीर- गोल्ड माइन हादसा
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किंशासा: मध्य अफ्रीका के कांगो में एक बड़ा हादसा हो गया है, जहां एक सोने की खदान ढह गई। जिसमें 10 मजदूरों की मौत हो गई। यह हादसा पूर्वी कांगों में दक्षिण किवु प्रांत के कबारे क्षेत्र में स्थित लुहिहि खदान में हुआ। मौजूदा समय में यह इलका विद्रोहियों के नियंत्रण में है। घटना की जानकारी विद्रोही समू द्वारा नियुक्त उप गवर्नर दुनिया मसुम्बुको ब्वेंज ने दी।

खदान ढहने को लेकर मसुम्बुको ब्वेंज ने कहा कि "हादसा जलवायु परिवर्तन के कारण आई प्राकृतिक आपदा की वजह से हुआ। उन्होंने कहा कि खदान में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी। बता दें कि मामले में मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

अभी भी मलबे में दबे हैं शव

इस हादसे की पूर्व गवर्नर जीन जैक्स पुरूसी ने भी पुष्टि की है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कई शव अभी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। वहीं 10 लोगों की मौत की पुष्टि उप गवर्नर मसुम्बुको ब्वेंज द्वार की गई है।

विद्रोही समूह का बढ़ता प्रभाव

बता दें कि यह इलाका फिलहाल रवांडा समर्थित विद्रोही संगठन M23 के नियंत्रण में है। यह संगठन पूर्वी कांगो के कई क्षेत्रों पर कब्जा कर चुका है, जिसमें लुहिही और प्रांतीय राजधानी बुकावु शामिल हैं। वहीं जनवरी 2024 से M23 का प्रभाव और बढ़ा है। पहले उन्होंने उत्तरी किवु के शहर गोमा, और फिर फरवरी में बुकावु पर कब्जा कर लिया।

M23 विद्रोही गुट चाहता है कांगों पर कब्जा

गौरतलब है कि कांगों के एक बड़े हिस्से पर M23 नामक विद्रोही गुट ने कब्जा कर लिया है। यह गुट 2012 में कांगो सेना से अलग होकर अस्तित्व में आया था। इसे तुत्सी जाति के लोगों ने बनाया है। वे दावा करते हैं कि भेदभाव से लड़ने के लिए ये गुट बनाया है, लेकिन माना जाता है कि ये गुट कांगो पर कब्जा करना चाहता है।

विद्रोही गुट M23 कांगो में सक्रिय 100 से ज्यादा विद्रोही गुटों में से एक है। इन विद्रोहियों ने 2012 में भी गोमा पर अस्थायी तौर पर कब्जा कर लिया था। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण ये पीछे भी हट गए थे, लेकिन 2022 से इस गुट ने फिर से हथियार उठा लिया और तेजी से पांव पसार रहा है। यह विद्रोही गुट अपने नियंत्रण वाले इलाके में एक समानंतर सरकार चलाता है।

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