बंगाल में BJP उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी, 144 सीटों पर उतारे कैंडिडेट्स; जानिए कौन कहां से लड़ेगा चुनाव?

West Bengal Assembly Elections: भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए अपने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं।
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ममता बनर्जी व सुवेंदु अधिकारी (सोर्स सोशल मीडिया)
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BJP Candidate List: BJP ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए अपने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। इसका मतलब है कि BJP ने अपने लगभग आधे उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है।

BJP ने इस सूची में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के नाम की भी घोषणा की है। उन्हें नंदीग्राम और भबानीपुर विधानसभा क्षेत्रों से मैदान में उतारा गया है। वहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को खड़गपुर सदर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। BJP की 144 उम्मीदवारों की सूची में से केवल 11 महिलाओं को टिकट दिया गया है।

ममता बनर्जी को नंदीग्राम में मिली थी हार

पिछले चुनाव में ममता को नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद संवैधानिक ज़रूरत को देखते हुए उन्होंने भबानीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा। TMC विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मुख्यमंत्री के लिए रास्ता बनाने के लिए अपनी सीट खाली करते हुए इस्तीफा दे दिया था।

भबानीपुर से भी लड़ेंगे सुवेंदु अधिकारी

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC की उम्मीदवारों की सूची में ममता बनर्जी का नाम किस क्षेत्र से आता है। पिछली बार उन्हें नंदीग्राम में हार मिली थी, जबकि अभी वह भबानीपुर से विधायक हैं। अब सुवेंदु अधिकारी को दोनों क्षेत्रों से चुनावी मैदान में उतार दिया गया है।

अब कहां से चुनाव लडे़ेंगी ममदा बनर्जी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ममता बनर्जी उनसे सीधे मुकाबला करेंगी या वह किसी तीसरी सीट से चुनाव लड़ना पसंद करेंगी? सभी की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी होंगी। यही वजह है ममता बनर्जी की उम्मीदवारी की घोषणा को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है और हर कोई TMC की उम्मीदवारों की सूची जारी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

ममता बनर्जी के खिलाफ सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारने की रणनीति को काफी असरदार माना जा रहा है, क्योंकि अगर वह खुद ही किसी जोरदार चुनावी मुकाबले में उलझ गईं तो उनके लिए दूसरे क्षेत्रों में असरदार ढंग से चुनाव प्रचार करना काफी मुश्किल हो जाएगा।

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