कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश तोड़ने के आरोप में ममता बनर्जी पर केस दर्ज, TMC ने बताया राजनीतिक बदला

Mamata Banerjee FIR: कोलकाता के कैथेड्रल रोड पर छात्र परिषद स्थापना दिवस के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस ने ममता बनर्जी और आयोजकों पर FIR दर्ज की है।
TMC Leader Mamata Banerjee
ममता बैनर्जी सोर्स- सोशल मीडिया
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FIR against Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भारी उबाल आ गया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल तृणमूल छात्र परिषद (WBTMCP) के आयोजकों के खिलाफ कोलकाता की हेस्टिंग्स पुलिस ने एक गंभीर मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कोलकाता के कैथेड्रल रोड पर आयोजित छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों और आदेशों की सरेआम अनदेखी की गई। इस घटना के बाद से राज्य में राजनीतिक पारा बेहद चढ़ गया है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन ने 28 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस नंबर 112 दर्ज किया है। यह मामला हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर अपु बैद्य की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। इस एफआईआर में ममता बनर्जी और अन्य आयोजकों के खिलाफ BNS की निम्नलिखित धाराएं लगाई गई हैं:

  • धारा 61(2): आपराधिक साजिश रचना।

  • धारा 223: किसी लोक सेवक द्वारा कानूनी रूप से जारी आदेश की अवज्ञा करना।

  • धारा 125(a): ऐसे कार्य करना जिससे दूसरों के जीवन या उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा पहुंचे।

  • धारा 132: ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी या लोक सेवक पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।

  • धारा 285: सार्वजनिक रास्तों पर लापरवाहीपूर्ण आचरण करना।

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कलकत्ता हाई कोर्ट के किस आदेश की उड़ीं धज्जियां?

शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छात्र परिषद के आयोजकों के साथ मिलकर एक सोची-समझी आपराधिक साजिश रची। इस साजिश के तहत कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा याचिका संख्या WPA No. 21728/2026 के संबंध में पारित किए गए आदेश का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया।

अदालत और प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति के अनुसार, यह कार्यक्रम 28 अगस्त को दोपहर 12 बजे से लेकर केवल दोपहर 3 बजे तक ही आयोजित किया जाना था। लेकिन पुलिस का आरोप है कि आयोजकों ने कोर्ट के आदेशों को दरकिनार करते हुए तय समय सीमा से काफी ज्यादा देर तक इस कार्यक्रम को जारी रखा।

भीड़ को उकसाने और पुलिस से भिड़ने का आरोप

पुलिस की लिखित शिकायत में ममता बनर्जी और कार्यक्रम के आयोजकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि मंच से ममता बनर्जी और अन्य नेताओं ने वहां मौजूद अपने समर्थकों को उकसाया। इसके बाद उग्र हुई भीड़ ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी और सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को भी जबरन हटा दिया।

इस धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। इसके अलावा, भारी भीड़ ने कैथेड्रल रोड के एक बड़े हिस्से पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह बाधित कर दिया, जिससे घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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TMC का तीखा पलटवार: 'यह राजनीतिक बदला है'

इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी पूरी तरह से हमलावर मुद्रा में आ गई है। पार्टी ने पुलिस और नगर निकाय की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे पूरी तरह "राजनीतिक बदले की भावना" से प्रेरित बताया है। टीएमसी का दावा है कि राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी असल में टीएमसी के बढ़ते प्रभाव से 'डरे हुए' हैं और इसी डर के कारण इस तरह के मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी ने कोर्ट की भूमिका पर उठाए सवाल

टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। उन्होंने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा, "पश्चिम बंगाल में संवैधानिक शासन का लगातार पतन हो रहा है और पूरा राज्य तेजी से पुलिस-राज की ओर बढ़ रहा है"।

अभिषेक बनर्जी ने आगे न्यायपालिका की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि जब राज्य की सत्ता बिना किसी संवैधानिक रोक-टोक और सीमा के काम करने लगे, तो आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका ही आखिरी उम्मीद बचती है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन के समय भी अदालतें हस्तक्षेप नहीं करेंगी, तो केवल लोगों की स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि खुद हमारे लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

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