सावन में भक्त काशी विश्वनाथ के शिवलिंग को क्यों नहीं छू सकते? जानिए वजह!

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी स्थित विश्वनाथ का शिवलिंग बहुत महत्वपूर्ण है। काशी को बनारस और वाराणसी भी कहा जाता है।

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यहां बाबा विश्वनाथ के दो मंदिर बेहद खास हैं। पहला विश्वनाथ मंदिर है जो 12 ज्योतिर्लिंगों में नौवां स्थान रखता है, जबकि दूसरे को नया विश्वनाथ मंदिर कहा जाता है।

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मान्यता है कि काशी नगरी देवाधिदेव महादेव के त्रिशूल पर बसी है।

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सावन आते ही देश-विदेश से लाखों भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए काशी आते हैं।

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इस बार 2 महीने तक चलने वाला सावन महीना होने के कारण शिवालयों में भक्तों की भीड़ रहेगी और इसी वजह से शिवालयों में दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।

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वहीं, काशी विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग को छूने पर रोक लगा दी गई है। श्रद्धालु यहां दर्शन के दौरान बाबा विश्वनाथ के दर्शन तो कर सकेंगे, लेकिन उनके करीब जाकर उन्हें छू नहीं सकेंगे।

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दरअसल सावन का महीना 4 जुलाई से 2 महीने तक रहेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने ये सख्त फैसला लिया है।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में 4 स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिसमें गर्भगृह का लाइव प्रसारण किया जाएगा।

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हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल अधिक मास लगने के कारण सावन का महीना 59 दिनों का होगा। 19 साल बाद सावन माह में विशेष संयोग बन रहा है।

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काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने सोमवार को VIP दर्शन पर भी रोक लगा दी है, ताकि भीड़ को नियंत्रित करने में कोई दिक्कत न हो।

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सावन माह में श्रद्धालु गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर रखे पात्र से ही जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर सकेंगे।

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