कुछ ऐसे खर्च जो बढ़ाते है कार खरीदने का खर्च
यहीं करते हैं ज्यादातर लोग गलती
अक्सर खरीदार सिर्फ एक्स-शोरूम या ऑन-रोड कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन असली खर्च कार खरीदने के बाद शुरू होता है।
फ्यूल का खर्च बढ़ा सकता है टेंशन
अगर आप रोज कार चलाते हैं, तो पेट्रोल या डीजल पर होने वाला खर्च आपके मासिक बजट का बड़ा हिस्सा बन सकता है।
हर साल भरनी होगी यह रकम
कार का इंश्योरेंस रिन्यू कराना जरूरी है। मॉडल और कवरेज के हिसाब से यह खर्च हजारों रुपये तक पहुंच सकता है।
कार की अच्छी सेहत की कीमत
इंजन ऑयल, फिल्टर बदलना और नियमित जांच करवाना जरूरी है। सर्विसिंग छोड़ने पर आगे बड़ा खर्च उठाना पड़ सकता है।
एक साथ खर्च होंगे हजारों रुपये
कुछ साल बाद टायर बदलने की जरूरत पड़ती है। अच्छे क्वालिटी के टायरों का पूरा सेट आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकता है।
शहरों में यह खर्च बढ़ रहा है
कई रिहायशी सोसायटी और कमर्शियल इलाकों में पार्किंग के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है।
कभी भी बिगड़ सकता है बजट
बैटरी खराब होना, ब्रेक सिस्टम में दिक्कत या किसी पार्ट का खराब होना अचानक बड़ा खर्च खड़ा कर सकता है।
सिर्फ कीमत नहीं, कुल खर्च देखें
कार खरीदने से पहले उसके 5-7 साल के अनुमानित खर्च का आकलन करें। इससे भविष्य में आर्थिक दबाव कम होगा।
सही प्लानिंग से बचेगा पैसा
नई कार खरीदना खुशी की बात है, लेकिन फ्यूल, इंश्योरेंस, सर्विसिंग और रिपेयर जैसे खर्चों को ध्यान में रखकर फैसला लेना ज्यादा समझदारी है।

