मंदिर को घर में कहा लगाए
ईशान कोण सबसे शुभ
घर में मंदिर रखने के लिए यह दिशा सर्वश्रेष्ठ होती है, क्योंकि यह भगवान शिव का स्थान माना जाता है।
पूर्व दिशा भी शुभ
अगर उत्तर-पूर्व में जगह न हो तो पूर्व दिशा में मंदिर बनाना अच्छा होता है, इससे सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
मंदिर कभी दक्षिण दिशा
वास्तु अनुसार दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है, जो पूजा स्थल के लिए अशुभ होती है।
रसोई, शौचालय या बेडरूम में मंदिर नहीं
यह स्थान शुद्धता के लिहाज से उपयुक्त नहीं माने जाते।
मंदिर ज़मीन पर सीधे नहीं
मंदिर को हमेशा लकड़ी के स्टैंड या प्लेटफॉर्म पर रखें, जिससे उसका स्तर ऊँचा रहे।
देवताओं की मूर्तियाँ दीवार से सटी न हों
मूर्तियों के पीछे थोड़ी जगह (कम से कम 2 इंच) छोड़ना चाहिए ताकि ऊर्जा का संचार बना रहे।
पूर्व या उत्तर की ओर मुख
इससे सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान शक्ति बढ़ती है।
मंदिर में बहुत अधिक मूर्तियाँ
5 से अधिक मूर्तियाँ रखना वास्तु अनुसार उचित नहीं माना जाता।
दीपक और अगरबत्ती दक्षिण-पूर्व कोने
यह अग्नि कोण है, जहाँ दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
मंदिर में सफाई और शुद्धता
रोजाना सफाई करें और ताजे फूल, जल व प्रसाद चढ़ाएँ ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
मंदिर के ऊपर स्टोरेज या टॉयलेट
यह वास्तु दोष उत्पन्न करता है और घर की सुख-शांति को प्रभावित कर सकता है।
छोटे घर में मंदिर का विकल्प
अगर जगह कम है तो लकड़ी का छोटा मंदिर दीवार पर उत्तर-पूर्व कोने में लगाएँ।

